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नरेगा का रुख जोहड़ से खेतों की ओर मुड़ा

खेतों में कुण्ड, केटल शेड, वृक्षारोपण जैसे 3 हजार से अधिक कार्यों के लिए

झुंझुनूं, महात्मा गांधी नरेगा योजना में झुंझुनूं जिले में राजस्थान के सभी 33 जिलों में सबसे कम श्रमिकों को काम देने का गत 4 साल का रिकॉर्ड अबकी बार टूटा है। सामान्य धारणा रही है कि झुंझुनूं जिले में नोकरियों तथा सिंचित खेती होने के कारण नरेगा जैसी कम मजदूरी वाली योजना में लोग रोजगार नही मांगते। परन्तु लोक डाउन के दौरान तथा कोरोना काल मे लोगों ने रोजगार मांगकर गत वर्षों का पूरे साल का रोजगार का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा नरेगा के अतिरिक्त जिला समन्वयक रामनिवास जाट के अनुसार गत चार सालों में प्रतिवर्ष औसत 24 लाख रोजगार दिवस सृजित किये गए थे, जबकि इस साल प्रथम साढ़े चार माह में अर्थात एक तिहाई समय मे ही 20 लाख रोजगार दिवस सृजित कर दिये गए। नरेगा वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार नरेगा श्रमिकों की मजदूरी पेट गत चार साल के दौरान औसत प्रतिवर्ष 32 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे, जबकि इस साल की प्रथम एक तिहाई अवधि में ही मजदूरी पेटे 32 करोड़ 80 लाख रुपये का खर्चा किया गया है । गत वर्ष तक जिले में कुल रोजगार में से 60 प्रतिशत से अधिक जोहड़ खुदाई जैसे मिट्टी इधर उधर करने के काम हुए, जबकि इस साल जून के बाद जोहड़ खुदाई के सभी कार्य अनुपयोगी मानकर बन्द कर दिये गये तथा लोगों के खेतों में कुण्ड, केटल शेड, वृक्षारोपण जैसे 3 हजार से अधिक कार्यों पर मानसून के दौरान भी 35 हजार श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार दिया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि जुलाई माह में पूरे राजस्थान में 53 लाख श्रमिक नरेगा में नियोजित थे जो अगस्त के तीसरे सप्ताह में केवल 18 लाख रह गये। जबकि झुंझुनूं जिले में इस अवधि में 40 हजार से 35 हजार अर्थात केवल 5 हजार श्रमिक कम हुए हैं। जिले में वर्तमान में नियोजित 35 हजार श्रमिकों में से 24 हजार अर्थात 70 प्रतिशत श्रमिक अपने खेतों में मस्टररोल पर सुधार कर रहे हैं। नरेगा कार्यो का रुख खेतों की ओर मोड़ देने के कारण अब जिले में किसी जोहड़, रास्ते या सड़क के नरेगा कार्य पर भीड़ नही दिखती है।

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