Hindi News / General News / सादगी से मनाई वीरवर महाराणा प्रताप की जयंती

सादगी से मनाई वीरवर महाराणा प्रताप की जयंती

समाज को संगठित होने का दिया संदेश

दांतारामगढ़,[लिखा सिंह सैनी] निकटवर्ती ग्राम घाटवा में रविवार को सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन की अनुपालन करते हुए महाराणा प्रताप की 480वीं जयंती सादगीपूर्ण मनाई गई। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ सुबह सवा 11 बजे एडवोकेट रमेश पारीक व भूतपूर्व सैनिक बहादुर सिंह शेखावत ने घाटवा के राजपूत सभागार में वीर सपूत महाराणा प्रताप व मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलित कर तथा राष्ट्रगान के माध्यम से किया। कार्यक्रम का आयोजन राजपूत सभाभवन के अध्यक्ष अर्जुन सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हुआ। इस मौके पर प्रताप के शौर्य को नमन करते हुए उपसरपंच सुरेन्द्र सिंह शेखावत, कैप्टन आनन्द सिंह, भू. पू. सैनिक यतेन्द्र सिंह, भू. पू. सैनिक नरेन्द्र सिंह, पं. मदन लाल शर्मा, दिलीप सिंह, भागीरथ सिंह, समाजसेवी अर्जुन जांगिड़, पंकज पारीक, शंकर सिंह राठौड़, राम सिंह, मूल सिंह, अध्यापक जसपाल सिंह, श्याम सिंह सहित राजपूत समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने महाराणा प्रताप के चित्र समक्ष वैश्विक महामारी के कारण शारीरिक दूरी का पालन करते हुए पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर एडवोकेट रमेश पारीक ने महान योद्धा के जीवन से जुड़ी ऐतिहासिक बातों का जिक्र करते हुए बताया कि राष्ट्रीय गौरव महाराणा प्रताप शौर्य व सजगता की मूर्ति थे। वैसे तो महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कई युद्ध किये लेकिन सबसे ऐतिहासिक युद्ध हल्दीघाटी का था, जिसमें उनका मानसिंह के नेतृत्व वाली अकबर की विशाल सेना से आमना- सामना हुआ। 1576 में हुए इस भंयकर युद्ध में करीब 20 हजार सैनिकों के साथ महाराणा प्रताप ने 80 हजार सैनिकों का सामना किया। इस युद्ध में प्रताप का घोड़ा जख्मी हो गया था। इसके अलावा महाराणा प्रताप ने कभी भी स्वाभिमान को नहीं छोड़ा। उन्होंने मुगल सम्राट की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई वर्षों तक संघर्ष किया। तत्पश्चात कार्यक्रम की समाप्ति पर अध्यक्ष महोदय ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आज के समय समाज को संगठित होकर कोरोना की जंग से लड़कर मुकाबला करना है, जिस प्रकार प्रताप ने जंगल में रहकर पत्तों पर रोटियां खाकर विपरीत परिस्थितियों का सामना किया तथा जीवन में अनेक मुकाबलों का सामना किया, उसी प्रकार हमें विपरीत परिस्थितियों में सादगीभरा जीवन जीकर कोरोना महामारी को हराना है। इससे पूर्व कार्यक्रम में उपसरपंच महोदय ने युवा वर्ग को महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही तथा साथ ही महाराणा प्रताप व देश भक्ति के जयघोष लगाकर माहौल को देशभक्ति की समां में बांध दिया। इससे पूर्व प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में घाटवा के माधोगढ़ डूंगर पर स्थित श्रीघाटवेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में लोगों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

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