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सम्पूर्ण जिले में धातु निर्मित मांझा के उपयोग एवं विक्रय पर पूर्णतया निषेध

दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए

सीकर, जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट यज्ञ मित्र सिंहदेव ने आदेश जारी कर दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए लोक स्वास्थ्य व विद्युत संचालन बाधारहित बनाए रखने एवं पक्षियों के लिये बडे पैमाने पर खतरा बन चुके धातु निर्मित मांझा की थोक एवं खुदरा बिक्री तथा उपयोग राजस्व जिला सीकर के क्षेत्राधिकारिता में निषेध, प्रतिबंध किया जाता है। उन्होंने बताया कि सीकर क्षेत्र में मकर संक्रान्ती पर्व पर पतंग बाजी के लिए धातुओं के मिश्रण से निर्मित मांझा प्रयुक्त किया जाने लगा है। यह मांझा विभिन्न धातुओं के मिश्रण के प्रयोग से तैयार किया जाता है जो पतंग के पैच लड़ने में अधिक कारगर होता है इस कारण से इसका प्रयोग अधिक किया जाने लगा है । यह मांझा विभिन्न धातुओं के मिश्रण से निर्मित होने से धारदार तथा विद्युत का सुचालक होता है जिसके उपयोग के दौरान दौपहिया वाहन चालकों तथा पक्षियों को अत्यधिक जान-माल का नुकसान होना संभाव्य है साथ ही विद्युत का सुचालक होने के कारण विद्युत तारों के सम्पर्क में आने पर विद्युत प्रवाह होने से पतंग उडाने वाले को भी नुकसान पहुंचना एवं विद्युत सप्लाई में बाधा उत्पन होना भी संभाव्य है। इस समस्या व खतरे के निवारण के लिए आवश्यक है कि धातु निर्मित मांझा के उपयोग एवं विक्रय का निषेध किया जावे। लोक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं पशु पक्षियों की जान के खतरे तथा विद्युत प्रसारण को बाधा रहित बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है। इस आदेश की अवहेलना भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अन्तर्गत दण्डनीय होगी। संबंधित थाना अधिकारी आदेश की पालना करना सुनिश्चित करें। यह आदेश 20 दिसम्बर 2019 की मध्य रात्रि से 25 जनवरी 2020 की मध्य रात्रि तक प्रभावशील रहेगा।

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