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सरकारी सहायता की बन्दरबांट पर लगी रोक

शौचालयों के लिये

झुंझुनूं, जिला खुले में शौच से मुक्त घोषित होने के बाद भी सन 2011 के सर्वे के बाद अलग हुए एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को शौचालय निर्माण के बाद दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि की आर्थिक सहायता की घोषणा के साथ ही जिले में आवेदकों की लाइन लग गई है। जनवरी के प्रथम सप्ताह में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को 31 जनवरी तक शत प्रतिशत शौचालय निर्माण का लक्ष्य देने पर पंचायत मुख्यालयों पर शिविर लगाये जाकर शौचालय विहीन परिवारों से आवेदन मांगे गये। सरकार द्वारा शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय बनवाने पर 12000 रुपये की एकमुश्त सहायता की घोषणा की जानकारी मिलते ही गत सप्ताह पंचायत कार्यालयों पर आवेदकों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिसे नियंत्रित करना ग्राम सचिवों के बूते से बाहर हो गया। अब तक जिले में 19000 आवेदन पत्र प्राप्त कर ऑनलाइन दर्ज किए गए। इनमे से अकेले उदयपुरवाटी ब्लॉक से12000 से अधिक आवेदन ऑनलाइन दर्ज कर दिये गये। ग्राम पंचायत छापोली, छावसरी, गुढ़ा गोड़जी, किशोरपुरा, पौंख, पचलंगी पोसाना बागोरा में तो 500 से अधिक संख्या में आवेदन ले लिये गये। प्राथमिक जांच के बाद पाया गया कि अधिकतर लोगों ने एक से अधिक बार सहायता के लालच में कर्मचारियों पर दबाव बनाकर आवेदन ऑनलाइन कर दिये गये। कुछ पंचायतों के सचिव तथा लिपिक भीड़ के दबाव के डर से मुख्यालय से नदारद रहते है। स्थिति को नियंत्रण में के लिये जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास जाट ने सभी सचिवों को पाबन्द किया है कि प्रत्येक आवेदन की जांच करें कि आवेदक परिवारों ने शौचालय निर्माण के लिये पूर्व कोई सरकारी सहायता नही ली है। वर्तमान में स्वीकृत शौचालयों की प्रथम में खाली स्थान पर जियो टैगिंग करवाई जावे। तथा अगले 15 दिनों के भीतर उसी स्थान पर शौचालय का निर्माण करवाकर पुनः जियो टैगिंग करवाई जाए व फोटो में शौचालय बनाना प्रमाणित हो तभी सरकारी सहायता मिलेगी। इससे सरकारी राशि के बर्बाद होने पर रोक लगी है। जाट ने कार्मिकों को को चेतावनी दी गई है कि यदि किसी ने अपात्र व्यक्ति का आवेदन ऑनलाइन किया है तो ऐसे कर्मचारी गलत जानकारी के लिये जिम्मेदार होंगे।

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