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सर्वाधिक शहीदों एवं सैनिको के जिले का शहीद स्मारक बदहाली का शिकार

दिन विशेष के बनकर रह गए हैं शहीदों के स्थल

जरा याद करो कुर्बानी. . . . . अब सुध भी ले लो इनकी निशानी की

झुंझुनू, कहा तो यह जाता है कि शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशा होगा लेकिन गौर करें झुंझुनू के शहीद स्मारक पर तो वहां अव्यवस्थाओं का आलम इस प्रकार से फैला हुआ है शहीदों की याद प्रशासन व नेताओं को महज दिन विशेष पर ही आती है। शहीद स्मारक झुंझुनू के रखरखाव हेतु कोई विशेष इंतजाम कहीं नजर नहीं आते हैं। एक तरफ प्रदेश में अब तक जितने भी शहीद हुए हैं उनकी मूर्तियों को लगाने के लिए पूर्व सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर अपनी मेहनत की कमाई से करोड़ो रूपये खर्च कर रहे है। वही झुंझुनू के शहीद स्मारक पर आमजन हेतु बैठने को लगी कुर्सी पर बाजौर साहब का नाम लिखा हुआ है उसकी हालत शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। शहीद स्मारक में बाजौर साहब की भेट की गई कुर्सी की जिला प्रशासन ने कितने अच्छे से देखभाल की यह आपके सामने है। जो जिला प्रशासन के लिए गहन चिंतन का विषय होना चाहिए। देश में सबसे अधिक सैनिक और शहीद देने वाले जिला झुंझुनू के शहीदों को और उनके परिजनों को यह बात अवश्य खलती होगी कि जिन सैनिकों ने अपने प्राण देश की रक्षा हेतु न्योछावर कर दिए उनकी याद में बना शहीद स्मारक पर उन शहीदों के अंकित नाम भी आज चमकने की बजाय धुंधले पड़ते नजर आ रहे हैं। जिला मुख्यालय पर यूं तो अनेक पार्को की स्थिति काफी अच्छी दिखाई दे रही है लेकिन शहर के मध्य में स्थित नेहरू पार्क जहां सभी सुविधाओं का समावेश एक साथ नजर आ रहा है। भले शहर के किसी ख़ास स्थल पर ऊंची लाइट न लगी हो तत्कालीन सभापति के मकान के पास बने इस पार्क में लाइट सीना तानकर खड़ी दिखाई देती है। वही शहर के गांधी उद्यान हो या शहीद स्मारक उसकी और जिला प्रशासन का ध्यान नहीं जाना या उसे हलके में लेने को लेकर हर देश भक्त के सीने टीस सी उठती है। अब आपको दिखाते है शहीद कर्नल जे पी जानू मार्ग पर लगी नाम पट्टिका के हाल जिस पर लिखा नाम तो धुंधला पड़ चूका है साथ ही इस जिले के रणबाकुरों का गौरव जितना ऊँचा है उससे तुलना की जाए तो नाम पट्टिका धरातल में धसने को आतुर है। वही शहीदों सम्मान के प्रतीक शहीद स्मारक की बात करे तो उसके उद्घाटन की पट्टिका जो पूर्व चेयरमैन तैयब अली के समय लगी थी वह अब फीकी पड़ चुकी है तो अब उनकी बहु नगमा बानो नगर सभापति बनी है तो देखने वाली बात है कि क्या नगमा बानो धुंधली पड रही पट्टिकाओं के साथ शहीद स्मारक की भी सुध लेगी। शहीद स्मारक पार्क में बने हुए मुख्य स्थल की बात करें तो जो बंदूक लगी हुई है उसकी रिबन टूटी हुई है। हमारे फौजी भाई देश की सीमाओं पर मजबूत बिम्ब बनकर खड़े होते हैं उनके सम्मान का प्रतीक शहीद स्मारक के पिलर उखड़ चुके हैं। जिन्होंने देश को एकता की कड़ियों में पिरोए रखने में अहम भूमिका निभाई थी उनके स्मारक के चारों ओर लगी जंजीर टूट चुकी है। वही स्मारक स्थल पर लगे हुए परिंडे खाली पड़े हैं कई परिंडे टूटकर लटक रहे हैं तो कईयों को उल्टा करके पेड़ पर टांग दिया गया है। एक समय विशेष पर परिण्डे लगाने वाले पक्षी प्रेमियों का भी इनकी तरफ ध्यान जाता है और न ही प्रशासन का। शहीद स्मारक स्थल के अंदर बेतरतीब दूब लगी हुई है जिसकी समय पर न तो कटिंग की जाती है और ना ही वह पूरे ग्राउंड में व्यवस्थित रूप से लगी है और न ही ऐसी गगन चुम्बी लाईट यह लगी है जो संगीन पर सर रखकर हमेशा हमेशा के लिए सोने वाले वीरों के स्थल को प्रकाशित कर सके।

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