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राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्र निर्माताओं के सम्मान में आयोजित किया जायेगा कार्यक्रम “गणतंत्र दिवस की गूँज”

राष्ट्रीय साहित्यिक व सामाजिक संगठन आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में

सूरजगढ़, देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिवीरों, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं के सम्मान में राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में राष्ट्रीय साहित्यिक व सामाजिक संगठन आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में “गणतंत्र दिवस की गूँज” कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। कोरोनावायरस की वजह से कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित होगा। विभिन्न राज्यों से सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्यकार ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लेकर गणतंत्र दिवस के महत्व पर राष्ट्र निर्माताओं के सम्मान में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का प्रभारी उत्तर प्रदेश से प्रयागराज की कवयित्री रेनू मिश्रा ‘दीपशिखा’ को बनाया गया है। लखनऊ से कंट्री ऑफ इंडिया न्यूज़ पेपर के प्रधान संपादक अज़ीज सिद्दीकी बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में शामिल होंगे। “गणतंत्र दिवस की गूँज” कार्यक्रम की प्रभारी रेनू मिश्रा दीपशिखा ने कार्यक्रम में शामिल किये जाने वाले साहित्यकारों की लिस्ट जारी करते हुए बताया कि हिंदी भाषा की प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा की शिष्या कविता उपाध्याय भी कार्यक्रम में भाग ले रही हैं। इनके अलावा लखनऊ से एडवोकेट अनुजा मिश्रा, प्रयागराज से कविता उपाध्याय, ऋतंभरा मिश्रा, डॉ. उपासना पाण्डेय, रचना सक्सेना, सुमन दुग्गल, रेनू मिश्रा, दिल्ली से स्नेहा उपाध्याय व भावना भारद्वाज, रायबरेली से पुष्पलता लक्ष्मी, फरीदाबाद से कमल धमीजा, हसनपुर अमरोहा से एडवोकेट मुजाहिद चौधरी, राजस्थान से भागमती कांटीवाल व सुनिल गाँधी, कटक ओडिशा से संघमित्रा राएगुरू, गोवा से विकास कुमार आदि साहित्यकारों को कार्यक्रम में शामिल किया गया है। गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की जानकारी देते हुए आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने बताया कि 26 जनवरी का भारत के इतिहास में विशेष महत्व है आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ। इसी दिन देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्म की घोषणा की थी। संविधान लागू होने के बाद में भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित हुआ। संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को इसलिए चुना गया था। क्योंकि वर्ष 1930 में 26 जनवरी को देश के महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ‘पूर्ण स्वराज’ का ऐलान किया था। आजादी से पहले 26 जनवरी का दिन स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता था। 1929 में लाहौर के ऐतिहासिक कांग्रेस अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज की घोषणा करते हुए इंकलाब जिंदाबाद उत्साहवर्धक नारों के बीच रावी नदी के तट पर भारतीय स्वतंत्रता का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराया और 26 जनवरी को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। 1930 से 26 जनवरी के दिन को देशवासी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते रहे। इसीलिए आजादी के बाद में इसी दिन को संविधान लागू कर गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया। हमें अपने संविधान पर गर्व होना चाहिए और देश की एकता को बढ़ाने वाले राष्ट्रीय पर्वों को पूरे जोशोल्लास के साथ मनाना चाहिये।

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