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टिड्डी नियंत्रण के लिए सतर्क होकर आपसी समन्वय से काम करें अधिकारी – गावंडे

जिला कलक्टर ने वीसी के जरिए एसडीएम, तहसीलदार व विकास अधिकारियों को दिए निर्देश

चूरू, जिला कलक्टर प्रदीप के गावंडे ने कहा है जिले में लगातार चल रहे टिड्डी दल आवागमन को लेकर एसडीएम, बीडीओ व तहसीलदार सतर्कता एवं सक्रियता के दिखाते हुए हुए टिड्डी नियंत्रण व कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर काम करें ताकि टिड्डी दल से किसानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। टिड्डी नियंत्रण में किसानों को कृषि विभाग एवं टिड्डी नियंत्रण यूनिट की उपस्थिति दिखनी चाहिए। जिला कलक्टर शुक्रवार को जन सुविधा केंद्र से वीसी के जरिए एसडीएम, तहसीलदार व विकास अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। इस दौरान एडीएम रामरतन सौंकरिया, सीईओ आर एस चौहान, एसीईओ डॉ नरेंद्र चौधरी, सहायक निदेशक (जनसंपर्क) कुमार अजय, तहसीलदार ओमप्रकाश जैन, टिड्डी चेतावनी संगठन के सहायक निदेशक डॉ वीडी निगम, कृषि उपनिदेशक पीके सैनी, कृषि अधिकारी कुलदीप शर्मा सहित अधिकारीगण भी मौजूद थे। टिड्डी नियंत्रण ऑपरेशन की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर गावंडे ने कहा कि वर्तमान में जिले में पीली टिड्डी के दल देखे जा रहे हैं जो कि प्रजनन की स्टेज में है। टिड्डी नियंत्रण व कृषि विभाग की टीम इन्हें नष्ट करे तथा किसानों को इस संबंध में जागरुक किया जाए। एसडीएम, बीडीओ अपने नेटवर्क को इस तरह सक्रिय करें कि सही समय पर सही सूचना मिले तथा उस सूचना पर त्वरित कार्यवाही हो। किसानों को यह लगना चाहिए कि प्रशासन 24 घंटे उनकी मदद के लिए तत्पर है। पटवारी और ग्रामसेवक इस काम में प्रभावी भूमिका निभाए तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का भी उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक तरफ लोग कोविड-19 के कारण परेशानी में है, ऎसे में टिड्डी के प्रकोप के कारण प्रशासन के लिए अधिक चुनौती और जिम्मेदारी का काम है कि वह किसानों को राहत देेने का काम करे। एडीएम रामरतन सौंकरिया ने कहा कि जहां फसल खड़ी है, वहां कृषि विभाग तथा बिना फसल वाले स्थानों पर टिड्डी कंट्रोल यूनिट समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा विभाग एवं प्रशासन के समन्वय से किसानों को जितना इस प्रकोप से बचाया जा सके, वह महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे टिड्डी नियंत्रण कार्य में कोताही व लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की रिपोर्ट भी भिजवाएं, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टिड्डी चेतावनी संगठन के सहायक निदेशक डॉ वीडी निगम ने टिड्डी और टिड्डी नियंत्रण पर तकनीकी जानकारी देते हुए टिड्डी की विभिन्न अवस्थाओं, प्रजनन, गति के बारे में बताया और कहा कि यह पीले रंग की टिड्डी तीन चार दिन तक एक ही जगह पर बैठती है, जिसके कारण कंट्रोल ऑपरेशन आसानी से संभव है। उन्होंने कहा कि ये सात दिन के अंतराल में तीन बार अंडे देती हैं तथा 60 से लेकर 80 अंडों के गुच्छे में अंडे देती है। किसानों को खुद भी अंडे नष्ट करने के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जिससे वे खुद भी यह काम कर सकते हैं। कृषि उपनिदेशक पी के सैनी ने बताया कि जिले में 18 मई को टिड्डी ने पहली बार प्रवेश किया था, उसके बाद करीब एक सौ से अधिक गांवों में ऑपरेशन चलाकर टिड्डी को खत्म किया जा चुका है। बैठक में संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे।

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