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वास्तव में वीर है यहां की माएं

पति हो गए थे सीमा पर शहीद अब इकलोते बेटे को भी भेज दिया बार्डर पर

सूरजगढ़(के के गाँधी) झुंझुनू जिले को सैनिकों का जिला और यहां की माओं को वीरमाता कहा जाता है यह साबित किया है कस्बे के शहीद राज कुमार कुमावत की वीरांगना मंजू देवी ने जिन्होंने अपने पति की शहादत के बाद अपने इकलौते बेटे को भी खुशी खुशी देश की रक्षा के लिए सीमा पर भेज दिया। बेटा भी बचपन से देश की रक्षा के लिए शरहद पर जाने को लालायित था। आज रविवार को मां ने अपने इकलोते बेटे को खुशी खुशी रवाना करते हुए कहा कि देशभक्ति का जुनून तो खून में होता है बेटे को भी बाप की तरह देशभक्ति का जुनून है। 18 साल पहले राजकुमार कुमावत देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हो गए थे उस समय एकमात्र पुत्र हेमंत की उम्र एक साल थी आज बेटा भी बाप की मौत का बदला लेने सीमा पर जा पहुंचा संयोग देखिये 2 फरवरी 2002 को राजकुमार कुमावत शहीद हुए थे और 2 मार्च को बेटे को ज्वानिंग मिली। इसलिए जिले को सैनिकों का जिला कहा जाता है क्योंकि यहां की मिट्टी के कण कण में देशभक्ति का जुनून है।

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