होली के उल्लास के बीच चिड़ावा में शोक की लहर, हजारों ने दी श्रद्धांजलि
चिड़ावा, मनीष शर्मा झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र में होली का उत्सव उस समय शोक में बदल गया, जब भारतीय वायुसेना के जवान संजय बराला की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी हुई उनके पैतृक गांव बारी का बास पहुंची।
गांव में जैसे ही पार्थिव देह पहुंची, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे क्षेत्र में मातम छा गया।
पठानकोट एयर बेस पर थे तैनात
संजय बराला, पुत्र सूबेदार मेजर प्रताप सिंह बराला, भारतीय वायुसेना में सार्जेंट के पद पर पठानकोट एयर बेस पर तैनात थे।
बताया जा रहा है कि वे कुछ समय से अस्वस्थ थे और मेडिकल लीव पर घर आए हुए थे। होली के दिन उनके निधन की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिवार में माता सावित्री देवी, बहन सुमन, पत्नी प्रियंका, पुत्र पुनीत (10 वर्ष) और पुत्री पूर्वी (4 वर्ष) हैं।
अनाज मंडी से निकली तिरंगा यात्रा
चिड़ावा अनाज मंडी से लेकर बारी का बास गांव तक तिरंगा यात्रा निकाली गई।
सैकड़ों युवाओं, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों ने हाथों में तिरंगा लेकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। पूरे मार्ग में “भारत माता की जय” और “वीर सपूत अमर रहे” के नारे गूंजते रहे।
एक स्थानीय युवक ने कहा,
“होली के दिन गांव ने अपना बेटा खो दिया, यह हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है।”
वायुसेना की टुकड़ी ने दी अंतिम सलामी
गांव पहुंचने पर वायुसेना की टुकड़ी ने फ्लाइंग ऑफिसर शताक्षी भट्ट की अगुवाई में गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी।
इस दौरान जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
चिड़ावा थाने से कार्यवाहक थानाधिकारी कैलाश चंद्र, तहसीलदार रामकुमार पूनिया सहित कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
होली के दिन जहां रंगों का उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं चिड़ावा क्षेत्र में हर आंख नम थी।
गांव के बुजुर्गों ने कहा,
“देश सेवा में जीवन समर्पित करने वाले वीर कभी मरते नहीं, वे अमर हो जाते हैं।”
क्षेत्र ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
