झुंझुनूं जिले के बगड़ क्षेत्र के बास काली पहाड़ी गांव में एक अनोखा सामाजिक उदाहरण सामने आया है।
यहां आयोजित एक सगाई समारोह अचानक विवाह में बदल गया, जिसने सभी को चौंका दिया।
पूजा और राहुल का रिश्ता हुआ पक्का
मानुता गांव से राहुल अपने परिवार के साथ सगाई के लिए पहुंचे थे।
तय कार्यक्रम के अनुसार केवल सगाई होनी थी, लेकिन माहौल और सहमति के चलते मौके पर ही सात फेरे करवा दिए गए।
पूजा, महिपाल सिंह और मंजू की पुत्री हैं, जिन्होंने गृह विज्ञान में पोस्टग्रेजुएशन और बीएड किया है।
वहीं राहुल, नाहर सिंह छाबा के पुत्र हैं और ट्रेवल्स व्यवसाय से जुड़े हैं।
शिक्षाविद की सलाह बनी अहम
इस रिश्ते को अंतिम रूप देने में शिक्षाविद डॉ. सुभाष बोला की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उनकी सलाह पर पहले सगाई तय हुई थी, लेकिन मौके पर परिस्थितियों के अनुसार विवाह का निर्णय लिया गया।
बिना दहेज हुआ सादगीपूर्ण विवाह
इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि पूरा कार्यक्रम बिना दहेज सम्पन्न हुआ।
दोनों परिवारों ने सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए यह कदम उठाया।
लोगों ने दी शुभकामनाएं
समारोह में मौजूद रिश्तेदार और ग्रामीण इस फैसले से आश्चर्यचकित जरूर हुए, लेकिन खुशी के साथ इसे स्वीकार किया।
सभी ने नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं देते हुए इस पल को यादगार बना दिया।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना आयोजन
यह अनोखा विवाह बास काली पहाड़ी और आसपास के इलाकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
“चट मंगनी पट ब्याह” की कहावत को साकार करता यह आयोजन सामाजिक समन्वय और समझदारी का उदाहरण बन गया है।



