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स्वतंत्रता सेनानी डॉ. सुशीला नायर व शहीद उधम सिंह की जयंती मनाई

क्रांतिकारी बीना दास, स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गोपीचंद भार्गव व भूपेंद्रनाथ दत्त को पुण्यतिथि पर किया नमन

झुंझुनू, आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में संस्थान के कार्यालय सूरजगढ़ में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री स्वतंत्रता सेनानी डॉ. सुशीला नायर व जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने वाले महान क्रांतिकारी अमर शहीद उधम सिंह की जयंती मनाई। इस मौके पर महान क्रांतिकारी महिला बीना दास व स्वतंत्रता सेनानी डॉ. भूपेंद्रनाथ दत्त और संयुक्त पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री व गांधी स्मारक निधि के प्रथम अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी गोपीचंद भार्गव को पुण्यतिथि पर नमन किया। सभी स्वतंत्रता सेनानियों के छायाचित्रों पर पुष्प अर्पित करते हुए स्वाधीनता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया। वीर तेजाजी विकास संस्थान के अध्यक्ष जगदेव सिंह खरड़िया, राजेंद्र फौजी, योगाचार्य डॉ. प्रीतम सिंह, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सैन, राजपाल सिंह फौगाट, डॉ. महेश सैनी आदि ने ऊधम सिंह और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन पर प्रकाश डाला। गांधीवादी राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. सुशीला नायर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने कहा- डॉ. सुशीला नायर एक भारतीय चिकित्सक, स्वतंत्रता सेनानी, महात्मा गांधी की अनुयायी और राजनीतिज्ञ थी। पेशे से डॉक्टर और महात्मा गांधी व कस्तूरबा गांधी की निकट सहयोगी डॉ. सुशीला नायर चार बार सांसद रहीं। केंद्र सरकार में वह 1962 से 1967 के बीच स्वास्थ्य मंत्री रहीं। उन्होंने जब राजनीति पारी शुरू की तो उनका लक्ष्य देश में जन स्वास्थ्य की सुविधाएं बेहतर बनाने को समर्पित रहा। 26 दिसंबर 1914 में जन्मीं सुशीला नायर स्वाधीनता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की करीबी सहयोगी और निजी चिकित्सक थीं। उन्होंने लेडी हार्डिंग कॉलेज दिल्ली और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी अमेरिका से डॉक्टर की पढ़ाई की। वह छोटी उम्र से ही गांधीजी के विचारों और कार्यों से प्रेरित थीं। 1948 में गांधी की हत्या के बाद डॉ. सुशीला नायर ने उनके रिकॉर्ड बनाए रखने का कठिन कार्य किया। वह जीवन भर अविवाहित रहीं और गांधीजी के विचारों और आदर्शों को हकीकत में बदलने में लगी रहीं। उन्होंने देश के विभाजन के अशांत काल के दौरान शांति और सांप्रदायिक सद्भाव लाने के लिए भी अथक प्रयास किया। आज़ादी के बाद सुशीला नायर राजनीतिक क्षेत्र में उतरीं। वह दिल्ली विधान सभा की सदस्य (1952-1956) और दिल्ली राज्य की स्वास्थ्य, पुनर्वास और परिवहन और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री (1952-55) और दिल्ली विधान सभा की अध्यक्ष (1955-56) थीं। भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर के मार्ग पर चलते हुए डॉ. सुशीला नायर नेहरू के मंत्रिमंडल में दिल्ली राज्य की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं और 1955 तक सेवा की। उन्होंने कस्तूरबा हेल्थ सोसाइटी की शुरुआत की और उसका पोषण किया और 1969 में सेवाग्राम में उनके द्वारा स्थापित महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एमजीआईएमएस) को विकसित करने में अपनी ऊर्जा लगाई और अपने जीवन के अंत तक इसके संस्थापक-निदेशक के रूप में काम करती रहीं। वह कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की अध्यक्ष और गांधी द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय गुजरात विद्यापीठ की कुलाधिपति भी थीं। डॉ. सुशीला नायर झांसी से चार बार लोकसभा की सांसद चुनी गई। झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्थापना उनके प्रयासों से संभव हो पाई। डॉ. सुशीला नायर का पूरा जीवन देश को समर्पित रहा। इस मौके पर शिक्षाविद् राजपाल सिंह फौगाट, राजेंद्र सैन, डॉ. प्रीतम सिंह खुगांई, जगदेव सिंह खरड़िया, कृष्ण कुमार शर्मा, डॉ. महेश सैनी एडवोकेट, राजेंद्र फौजी, रामस्वरूप नेता, मनोहर लाल जांगिड़, बनवारी भाम्बू, करण सिंह दीवाच, योगा खिलाड़ी सुदेश खरड़िया, अंजू गांधी आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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