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स्वतंत्रता सेनानी अम्मल व ठक्कर और भारत रत्न अब्दुल गफ्फ़ार खान की पुण्यतिथि मनाई

सूरजगढ़, गाँधी कृषि फार्म सूरजगढ़ में आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाली महान स्वतंत्रता सेनानी अंजलाई अम्मल व महात्मा गाँधी से प्रेरित होकर देश की आजादी और दलित वंचित वर्ग के उत्थान के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, ठक्कर बाप्पा के नाम से विख्यात संविधान सभा के सदस्य अमृतलाल ठक्कर और स्वतंत्रता संग्राम में साये की तरह महात्मा गाँधी के साथ रहे महान स्वतंत्रता सेनानी भारत रत्न सीमांत गाँधी खान अब्दुल गफ्फार खान की पुण्यतिथि मनाई। इस मौके पर पंडित जवाहरलाल नेहरू और भूलाभाई देसाई के साथ आजाद हिंद का मुकदमा लड़ने वाले प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता सेनानी तेज बहादुर सप्रू को भी उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया। सभी स्वतंत्रता सेनानियों के छायाचित्रों पर पुष्प अर्पित करते हुए देश की आजादी और राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को याद किया। स्वतंत्रता सेनानी अंजलाई अम्मल के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी ने कहा- महान वीरांगना अंजलाई अम्मल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ‘असहयोग आंदोलन’ से की थी। अंजलाई अम्मल को 1921 में ‘असहयोग आंदोलन’ में भाग लेने वाली पहली दक्षिण भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त है। इस आंदोलन का हिस्सा बनने के बाद वह कभी भी पीछे नहीं हटीं। नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, व्यक्तिगत सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन सहित महात्मा गाँधी के सभी आंदोलनों में अंजलाई अम्मल ने बढ़ चढ़कर कर भाग लिया और कई बार देश की आजादी के लिए जेल गई। अपनी गर्भावस्था के दौरान भी वह जेल में ही थीं। प्रसव पीड़ा के दौरान लिए उन्हें दो हफ्ते के लिए जेल से रिहाई मिली और तभी उन्होंने अपने सबसे छोटे बेटे को जन्म दिया। इसके बाद उन्हें फिर से जेल भेज दिया गया। उन्होंने अपने नवजात बच्चे की देखभाल जेल से ही की। उनके साथ उनकी नौ साल की बेटी भी जेल में रही। अंजलाई अम्मल ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपनी संपत्ति और घर बेच दिया और सारा पैसा आंदोलनों में खर्च कर दिया। वे गरीबी में रहते हुए स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रहीं। 1947 में जब देश आजाद हो गया, तब उन्हें तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य के रूप में चुना गया। वह आगे भी राजनीति से जुड़ी रहीं, वे तीन बार लगातार तमिलनाडु विधानसभा की सदस्य रहीं। 20 जनवरी 1961 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। ठक्कर बाप्पा के बारे में धर्मपाल गाँधी ने बताया कि वह एक महान सामाजिक कार्यकर्ता व स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य थे, संविधान निर्माण के दौरान उन्होंने वंचित वर्ग के लिए आरक्षण को संविधान में जोड़ने की पैरवी की थी। 1933 में उन्होंने महात्मा गाँधी के साथ हरिजन आंदोलन के दौरान पूरे देश का भ्रमण किया। उन्होंने हरिजनों के मंदिर प्रवेश तथा जलाशयों के उपयोग और उनके अधिकारों के आंदोलनों को आगे बढ़ाया। 1946-47 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान गाँधी जी की नोआखली यात्रा में भी वे उनके साथ थे। सीमांत गाँधी खान अब्दुल गफ्फार खान ने हिन्दुस्तान की आजादी और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए 40 वर्षों से अधिक समय जेलों में बिताया। वे महात्मा गाँधी के कट्टर अनुयायी थे। सभी महान विभूतियों को आदर्श समाज समिति इंडिया परिवार नमन करता है। इस मौके पर आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी, पूर्व पंचायत समिति सदस्य चाँदकौर राजेंद्र कुमार गाँधी, सोनू कुमारी, सुनील गाँधी, पिंकी नारनोलिया, अंजू गाँधी, तनिष्का व हर्ष गाँधी आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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