Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / काकोरी काँड के महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल,खान, सिंह और लाहिड़ी का बलिदान दिवस मनाया

काकोरी काँड के महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल,खान, सिंह और लाहिड़ी का बलिदान दिवस मनाया

सामाजिक कार्यकर्ता धर्मपाल गाँधी की अध्यक्षता में

झुंझुनू, स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक घटना काकोरी कांड के महान क्रांतिकारी अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी का बलिदान दिवस सामाजिक कार्यकर्ता धर्मपाल गाँधी की अध्यक्षता और अशोक पूनियां के मुख्य आतिथ्य में लीलाधर शिक्षा निकेतन आदर्श योग कक्षा बलौदा में मनाया। कार्यक्रम के मार्गदर्शक और प्रेरक योगाचार्य डॉ. प्रीतम सिंह रहे। काकोरी कांड के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने कहा- हम खुशी में रहें या गम में रहें, हम किसी भी कीमत पर वतन पर मर मिटने वाले आजादी के दीवानों को नहीं भूल सकते। 9 अगस्त 1925 को अंग्रेजों के खिलाफ चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने के लिए क्रांतिकारियों ने काकोरी कांड को अंजाम दिया था, इस मामले में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को फांसी की सजा सुनाई गई थी। आज ही के दिन 19 दिसंबर 1927 को भारत के शहीद क्रांतिकारियों अशफाक उल्ला खां, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा दी गई थी। तीनों क्रांतिकारियों को ये सजा काकोरी कांड के लिए दी गई थी जिसमें ये दोषी पाए गए थे। तीनों क्रांतिकारियों की फांसी की सजा एक ही तारीख पर दी गई थी। लेकिन फांसी के लिए तीन अलग- अलग जेल चुनी गई थीं। क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश सरकार ने गोरखपुर जेल में फांसी पर चढ़ा दिया। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी कांड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे तथा हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे। महान क्रांतिकारी अमर शहीद अशफाक उल्ला खान को फैजाबाद जेल में फांसी दी गई। क्रांतिकारी रोशन सिंह को इलाहाबाद जेल में फांसी दी गई।आप इसे महज इत्तेफाक ही मान सकते हैं। अशफाक उल्ला खां, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह का जन्म एक जगह पर हुआ और फांसी भी एक दिन दी गई। तीनों का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। क्रांतिकारी राजेंद्र लाहिड़ी को भी 19 दिसंबर को ही फांसी दी जानी थी, लेकिन जनता के विद्रोह को देखते हुए राजेंद्र लाहिड़ी को गोंडा जेल में दो दिन पहले यानी 17 दिसंबर को फांसी पर चढ़ा दिया गया था। देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को हम भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि अशोक पूनियां ने भी अमर शहीदों के जीवन पर प्रकाश डाला और गोल्ड मेडलिस्ट योगाचार्य सुदेश खरड़िया व सिल्वर मेडलिस्ट संदीप को गोल्ड प्लेट रामदरबार भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर पंतजलि प्रभारी व योगाचार्य डॉ. प्रीतम सिंह, नेशनल योगा प्लेयर सुदेश खरड़िया, संदीप कुमार, मौसम बरवड़, निशू, खुशी वर्मा, जिया, खुशी, कनिका, विशाल बेरला आदि अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीतम सिंह ने किया।

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