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डाइट झुंझुनू में ई कॉन्टेंट निर्माण कार्यशाला का समापन

झुंझुनूं, डाइट झुंझुनू में पांच दिवसीय ई कॉन्टेंट निर्माण कार्यशाला का समापन जिला शिक्षा अधिकारी व् डाइट प्राचार्य मनोज कुमार ढाका की अध्यक्षता में शुक्रवार को किया गया । ईटी प्रभागाध्यक्ष डॉ राजबाला ढाका एवं कार्यशाला प्रभारी सरिता व विनीता के निर्देशन में संभागीयों द्वारा विद्यार्थियों के लिए उपयोगी ई कॉन्टेंट तैयार किए गए। ई कॉन्टेंट निर्माण कार्यशाला में डॉ नवीन ढाका, चंद्रभान एवं राजेश झाझडिया के मार्गदर्शन में संभागीयों द्वारा बच्चों के लिए रोचक और उपयोगी ई कॉन्टेंट तैयार किए गए। निर्माणकर्ता टीम में राकेश कुल्हरी, सुमित नूनिया, रितुबाला, कविता, रजनीश कालेर, अनील कुमावत, अमित पूनिया, अनील चौधरी, प्रमोद कुमार, सचिन चौधरी आदि संभागी उपस्थित रहे। प्राचार्य मनोज ढाका द्वारा इस कार्यशाला के उद्देश्यो में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न विषयों को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए नवीनतम डिजिटल टूल्स का उपयोग करने की उपयोगिता बताई गई। कार्यशाला में वीडियो, सिमुलेशन, पॉडकास्ट, एनीमेशन, और गेम जैसे ई-कंटेंट निर्माण के कई नवीन तरीके अपनाए जा रहे हैं, को शामिल किया गया l

प्रभागाध्यक्ष डॉ राजबाला ढाका ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ शैक्षणिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ रहा है। इसमें ई-कंटेंट का भी बहुत महत्त्व है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा के डिजिटलीकरण और गुणवत्ता को प्राथमिकता दी गई है। ई-कंटेंट न केवल छात्रों को शिक्षा का नवीन अनुभव प्रदान करता है बल्कि उनके समझने के कौशल को भी बढ़ाता है। डिजिटल युग में शिक्षकों के लिए यह आवश्यक है कि वे नए तरीकों को अपनाकर विद्यार्थियों को आकर्षित कर सकें और शिक्षा को सजीव बना सकें। ई-कंटेंट के माध्यम से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि बच्चों की सीखने का कौशल और दक्षता में बढ़ोतरी होगी।

कार्यशाला में डाइट प्राचार्य मनोज ढाका ने ई-कंटेंट निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी और इसके फायदों के बारे में बताया। ई- कंटेंट की मदद से बच्चों को विषय वस्तु को गहराई से समझाने में सहायता मिलेगी, और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रोत्साहन मिलेगा। शिक्षण शास्त्र के बारे में विचार साझा किए। इस पांच दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को ई-कंटेंट निर्माण की तकनीकों में दक्षता मिलेगी, जिससे क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।

डिजिटल शिक्षा ना केवल छात्रों को शिक्षा के नवीन अनुभव प्रदान करता है, बल्कि उनके समझने के कौशल को भी बढ़ाता है। डिजिटल युग में शिक्षकों के लिए यह आवश्यक है कि वे नए तरीकों को अपनाकर विद्यार्थियों को आकर्षित कर सकें और शिक्षा को सजीव बना सकेंl इस पांच दिवसीय कार्यशाला में कक्षा 3 से 8 के विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों पर ई कॉन्टेंट जैसे वन सम्पदा, प्रजनन, जैवविविधता, प्राकृतिक आपदाओं का प्रबंधन, प्रकाश संश्लेषण, उदयपुर और बीकानेर की सैर आदि विषयों के ई कंटेंट तैयार किए गए l ई-कंटेंट के माध्यम से न केवल शिक्षा – की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि बच्चों के सीखने में रुचि भी बढ़ेगी और यह एक अहम कदम साबित होगा।

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