उदयपुरवाटी,कैलाश बबेरवाल। राजस्थान सहकारी विभाग के रजिस्ट्रार ने दादिया सहकारी समिति के दिवंगत व्यवस्थापक के परिजनों से 10,03,945/- रुपये वसूलने के आदेश को निरस्त कर दिया। यह निर्णय परिवार के लिए बड़ी राहत के साथ-साथ सहकारी कानून में न्यायसंगत निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।
मामला और विवाद
समिति के पूर्व व्यवस्थापक स्व. बजरंग लाल शर्मा के खिलाफ 2014-15 और 2015-16 की ऑडिट रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं का आरोप था। इसके आधार पर विभाग ने ₹10 लाख से अधिक की वसूली का आदेश जारी किया।
हालांकि, स्व. शर्मा 2006 में सेवानिवृत्त हो चुके थे और उनका निधन 11 जून 2016 को हो चुका था। बावजूद इसके, विभाग ने उनके वारिसों को जिम्मेदार ठहराया।
अधिवक्ता प्रमोद सैनी पौंख की दलील
उच्च न्यायालय में अधिवक्ता प्रमोद सैनी पौंख ने तर्क दिया कि “मृतक के दायित्व वारिसों पर नहीं थोपे जा सकते।” उन्होंने बताया कि किसी मृत कर्मचारी द्वारा कथित कृत्यों के लिए उसके उत्तराधिकारियों को तब तक जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जब तक कोई प्रत्यक्ष प्रमाण न हो।
“व्यक्तिगत उत्तरदायित्व कर्मचारी के साथ ही समाप्त हो जाता है। इसे उत्तराधिकारियों पर थोपना पूरी तरह विधि विरुद्ध है।” – प्रमोद सैनी पौंख
न्यायालय का निर्णय
सहकारी विभाग के सक्षम प्राधिकारी ने अधिवक्ता की दलीलों और अभिलेखों को मानते हुए वसूली आदेश को निरस्त कर दिया।
इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया कि बिना ठोस विधिक आधार के मृतक के परिजनों से वित्तीय वसूली नहीं की जा सकती।
