नोएडा। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समारोह में प्रख्यात लेखक, इतिहास शोधकर्ता, पत्रकार एवं समाजसेवी धर्मपाल गांधी को ‘वतन-ए-सारथी इतिहासकार सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उनकी बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘स्वाधीनता की दास्तान’ का भी लोकार्पण किया गया।
यह पुस्तक वर्तमान अंकुर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। समारोह में धर्मपाल गांधी की एक अन्य कृति ‘साझा काव्य भावांजलि’ का भी विमोचन किया गया।
साहित्य और इतिहास के क्षेत्र में योगदान का मिला सम्मान
कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार विनोद अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता उपस्थित रहे।
समारोह में साहित्य, इतिहास, पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में धर्मपाल गांधी के उल्लेखनीय योगदान को सराहते हुए उन्हें सम्मानित किया गया।
नई पीढ़ी तक इतिहास पहुंचाने में लेखकों की अहम भूमिका
राष्ट्रीय सरपंच संघ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं यूथ आइकॉन मंजू तंवर ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में लेखकों और इतिहासकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने धर्मपाल गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम और गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों पर किए जा रहे शोध एवं लेखन कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान इतिहास, साहित्य और राष्ट्रचेतना के प्रति समर्पित लेखनी का सम्मान है।
देशभर के साहित्यकार और पत्रकार हुए शामिल
कार्यक्रम में नोएडा प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहम्मद आजाद, साहित्यिक संपादक सुनीता सोनू, वर्तमान अंकुर के प्रधान संपादक निर्मेश त्यागी ‘वत्स’, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी मनजीत सिंह तंवर, राकेश कुमार, नीरज निर्वाण, सुनील गांधी, दरिया सिंह डीके और कुणाल तंवर सहित अनेक साहित्यकार, कवि और पत्रकार मौजूद रहे।
कवि सम्मेलन ने बांधा समां
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।
शिक्षाविद् एवं समाजसेवी मनजीत सिंह तंवर ने अपनी ओजस्वी कविता ‘इंकलाब’ का प्रभावशाली पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनकी प्रस्तुति को कार्यक्रम में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हिंदी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को मिला बढ़ावा
समारोह के अंत में वर्तमान अंकुर के प्रधान संपादक निर्मेश त्यागी ‘वत्स’ ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया। उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने इस आयोजन को हिंदी भाषा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।





