झुंझुनूं। जिले के निकटवर्ती भीमसर गांव के युवा लेखक और शोधकर्ता डॉ. जुल्फिकार ने एक बार फिर शेखावाटी का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
स्वामी विवेकानंद पर लंबे समय से शोध कार्य कर रहे डॉ. जुल्फिकार का नाम अब ‘एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज किया गया है। संस्था ने सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उनकी उपलब्धि को आधिकारिक मान्यता प्रदान की है।
80 हजार कैलेंडर और 20 हजार पुस्तकें बांटी
डॉ. जुल्फिकार को यह उपलब्धि 80,000 विवेकानंद कैलेंडर और 20,000 विवेकानंद पुस्तकें नि:शुल्क वितरित करने पर मिली है।
उन्होंने वर्षों से स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं और राष्ट्रनिर्माण के संदेश को युवाओं तक पहुंचाने का अभियान चला रखा है।
देश-विदेश में सराहा गया शोध
डॉ. जुल्फिकार लंबे समय से स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन पर शोध कर रहे हैं। उनका कार्य भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सराहा गया है।
स्थानीय लोगों ने उनकी इस उपलब्धि को झुंझुनूं और शेखावाटी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया।
पहले भी बना चुके हैं तीन विश्व रिकॉर्ड
डॉ. जुल्फिकार देश के ऐसे पहले भारतीय मुस्लिम शोधकर्ता हैं, जिनका नाम विवेकानंद केंद्रित कार्यों के लिए पहले भी तीन अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड पुस्तकों में दर्ज हो चुका है।
लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर स्थित रामकृष्ण मठ-मिशन संस्थाओं पर शोध करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम युवा के रूप में सम्मान मिला।
यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
प्रदेशभर में 10 हजार विद्यार्थियों के बीच विवेकानंद प्रतियोगिता आयोजित करने पर रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
भारत बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
बेलूर मठ सहित देशभर के 50 से अधिक रामकृष्ण मठों के भ्रमण और विवेकानंद विषय पर 32 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों के आयोजन के लिए सम्मान मिला।
युवाओं के लिए प्रेरणा
ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के क्षेत्र में उनका योगदान लगातार चर्चा में है।





