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Video News: झुंझुनू: शराब के पैसे नहीं देने पर 82 वर्षीय बुजुर्ग से मारपीट

पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर, बेटो ने भी माँ बाप को छोड़ा मझधार में

झुंझुनूं में बुजुर्ग से बेरहमी से मारपीट, पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर

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झुंझुनू, झुंझुनू जिला मुख्यालय से अपराध से जुडी और संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक वारदात सामने आई है। जिसने पुलिस और प्रशासन की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि झुंझुनू जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 31 भेरूजी मंदिर के पास निवास करने वाले बुजुर्ग दंपत्ति कि यह पीड़ा आपकी आंखों में भी आंसू ले आएगी।

शराब के पैसे मांगे, नहीं देने पर गिराया और पीटा

घटना के अनुसार बुजुर्ग बनवारी लाल अपने मोहल्ले में ही कुर्सी पर बैठे हुए थे। मोहल्ले का युवक जो आदतन शराबी बताया जा रहा है उसने 82 वर्षीय बुजुर्ग बनवारी लाल से शराब के लिए पैसे मांगे और शराब के लिए पैसे नहीं देने पर उनको कुर्सी से गिरा दी गिरा दिया और जमीन पर पटक कर बेरहमी से उनके साथ मारपीट की गई। जुलुम की इंतहा यहीं खत्म नहीं हो जाती बुजुर्ग की पत्नी सरस्वती देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि युवक के खौफ के चलते पहले तो किसी ने उनकी मदद भी नहीं की और फिर आस -पड़ोस के लोगों के फोन से पुलिस को फोन करवाया गया तो उनका फोन भी रिसीव नहीं हुआ।

तीन दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

अपराध और दबंगई के साथ संवेदनहीन हो चुके लोगो के बीच की यह घटना शुक्रवार शाम की बताई जा रही है। थक हार कर सरस्वती देवी ने रविवार को कोतवाली थाने पर पहुंचकर आपबीती सुनाई लेकिन आज सोमवार तक दंपति के अनुसार पुलिस प्रशासन ने उनकी कोई सुध नहीं ली।

बेटों ने भी नहीं ली सुध

वही मोहल्ले के ही एक कंपाउंडर ने बुजुर्ग बनवारी लाल की मरहम पट्टी की। बुजुर्ग दंपति ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने कहने को तो चार बेटों को जन्म दिया है, एक बेटा उनका एक्सपायर हो चुका है बाकी के तीन बेटे झुंझुनू में ही रहते हैं लेकिन बुजुर्ग दंपति की किसी भी प्रकार से वह सुध नहीं ले रहे है। यहाँ तक बूढ़े बाप की पिटाई की वारदात के बाद भी उनकी संवेदनाए नहीं जागी। दोनों बुजुर्ग इसी पुराने घर में अपना जैसे तैसे करके जीवन यापन कर रहे हैं। आजीविका के संसाधन की बात करें तो वृद्धावस्था पेंशन के साथ घर के पुराने बर्तन बेचकर ही वह अभी तक अपना गुजारा करते आ रहे हैं और मारपीट की घटना होने के बाद भी इस बुजुर्ग दंपति के बेटों ने उनकी सुध नहीं लेना भी अपने आप में झकझोर देने वाला मामला है।

मानवाधिकार आयोग के निर्देश भी बेअसर

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि गत दिनों ह्यूम न राइट कमीशन के स्पेशल मॉनिटर बालकृष्ण गोयल झुंझुनू के दौरे पर आए थे और उन्होंने पुलिस और प्रशासन के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर विभिन्न मामलों में दिशा निर्देश दिए थे, हालांकि यह बात अलग है कि उनमें किसी भी निर्देशों की अभी तक पालना देखने को नहीं मिली। उनमें एक प्रमुख मुद्दा यह भी था कि ऐसे बुजुर्ग व्यक्ति जिनके संतान है और वह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं और बुजुर्ग मां-बाप को उन्होंने एक तरह से छोड़ रखा है तो ऐसे बेटों पर भी प्रशासनिक शिकंजा कसा जाए बाकायदा उन्होंने इसके लिए एक पूरी प्रक्रिया भी जिला कलेक्टर की उपस्थिति में बताई थी। जिला प्रशासन कि ऐसे मामलों में संवेदनहीनता के साथ ह्यूमन राइट कमीशन के अन्य निर्देशों की अवहेलना ही अभी तक झुंझुनू में देखने को मिल रही है।

समाज और व्यवस्था दोनों पर सवाल

सबसे बड़ी बात है पुलिस को घटना की सूचना देने और बुजुर्ग महिला द्वारा खुद कोतवाली पहुंचकर आपबीती सुनाने पर भी आज समाचार लिखे जाने तक झुंझुनू पुलिस ने पीड़ित परिवार की सुध नहीं ली और ना ही जिला प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई देखने को मिली है। शराब के पैसे नहीं मिलने पर 82 वर्षीय बुजुर्ग के साथ बेरहमी से मारपीट की गई यह मामला जहां अपराध से जुड़ा हुआ तो है ही इसके साथ ही सामाजिक ताने-बाने के साथ पुलिस और प्रशासन की संवेदनशीलता की शून्यता को भी दर्शाता है।

निष्कर्ष

झुंझुनूं में बुजुर्ग पर अत्याचार और पुलिस प्रशासन की लापरवाही समाज के गिरते मानवीय मूल्यों की ओर संकेत करती है। मानवाधिकार आयोग के निर्देशों की अनदेखी पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। शेखावाटी लाइव ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू

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