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Jhunjhunu News : झुंझुनूं में ग्लूकोमा जागरूकता, 40 के बाद जांच जरूरी

CMHO Jhunjhunu releasing glaucoma awareness poster during health campaign

विश्व ग्लूकोमा सप्ताह पर लोगों को आंखों की जांच के लिए किया जागरूक
झुंझुनूं में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के तहत लोगों को आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा (काला मोतिया) के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

मंगलवार को सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने ग्लूकोमा जागरूकता के लिए तैयार पोस्टर का विमोचन किया और लोगों से समय-समय पर आंखों की जांच कराने की अपील की।


धीरे-धीरे आंखों की रोशनी खत्म कर सकती है बीमारी

डॉ. गुर्जर ने बताया कि ग्लूकोमा एक गंभीर नेत्र रोग है, जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को समाप्त कर सकता है

इस बीमारी के लक्षण कई बार शुरुआत में स्पष्ट नहीं होते, इसलिए समय रहते जांच करवाना बेहद जरूरी है।


ये हो सकते हैं ग्लूकोमा के लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ग्लूकोमा होने पर:

  • आंखों के सामने चमकती या रंगीन लकीरें दिखाई देना
  • आंखों में दर्द या दबाव महसूस होना
  • धीरे-धीरे दृष्टि कम होना

जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत नेत्र चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए।


आंखों का दबाव बढ़ने से होता है नुकसान

डॉ. गुर्जर ने बताया कि ग्लूकोमा में आंखों का दबाव बढ़ जाता है, जिससे आंखों की नसों पर असर पड़ता है।

समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी स्थायी अंधेपन का कारण भी बन सकती है।

विश्व स्तर पर अंधेपन के प्रमुख कारणों में ग्लूकोमा भी शामिल है।


40 वर्ष के बाद नियमित जांच जरूरी

स्वास्थ्य विभाग ने 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी है।

इस आयु वर्ग में ग्लूकोमा होने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए समय-समय पर नेत्र परीक्षण कराना आवश्यक है।


बिना डॉक्टर की सलाह दवा न डालें

सीएमएचओ ने लोगों को यह भी चेतावनी दी कि बिना चिकित्सक की सलाह के आंखों में किसी भी प्रकार की दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आंखों को नुकसान हो सकता है।


ये अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें:

  • डिप्टी सीएमएचओ डॉ. भंवरलाल सर्वा
  • डीपीओ डॉ. विक्रम सिंह
  • सहायक लेखाधिकारी मनीराम
  • डीपीसी डॉ. महेश कड़वासरा

शामिल थे।