झुंझुनूं जिले में गुढ़ागौड़जी तहसील के राजस्व मामलों को लेकर विवाद गर्मा गया है। उदयपुरवाटी अभिभाषक संघ की मांग है कि तहसील के राजस्व प्रकरण झुंझुनूं से हटाकर उदयपुरवाटी उपखंड न्यायालय में स्थानांतरित किए जाएं। इसका उद्देश्य है कि स्थानीय पक्षकार और वकील लंबी दूरी तय न करें।
आमरण अनशन और वकीलों की एकजुटता
बार संघ अध्यक्ष श्रवण सैनी और हनुमान गुर्जर पिछले 8 दिन से अन्न त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे हैं।
हमारी मांग जनता और वकीलों की सुविधा के लिए है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए,”– धरने पर मौजूद वकील।
धरने में एडवोकेट ब्रजमोहन सैनी, अशोक स्वामी, रामचन्द्र, अशोक मीणा, हंसकुमार शर्मा सहित दर्जनों वकील शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांग पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
जिला बार का विरोध और कार्य बहिष्कार
इस मांग के विरोध में जिला अभिभाषक संघ झुंझुनूं ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना और तीन दिवसीय स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार शुरू किया। अध्यक्ष रतन मोरवाल का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था जनता की सुविधा के अनुरूप है और गुढ़ागौड़जी के मामले झुंझुनूं में सुचारू रूप से चल रहे हैं।
अधिवक्ताओं के इस विरोध से अदालतों और कलेक्ट्रेट में कामकाज ठप हो गया। दूर-दराज से आए पक्षकार बिना सुनवाई के निराश लौटे। जिला बार ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जनविरोधी फैसला लिया तो आंदोलन और उग्र होगा।
राजनीति और जनता की प्रतिक्रिया
दोनों पक्ष जनता की सुविधा का हवाला देकर अपनी-अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। वही वकीलों की एकता को अब तक मिसाल माना जाता रहा है लेकिन अब उपखण्ड और जिला बार के ही आमने सामने होना भी लोगो में चर्चा का विषय बनता जा रहा है, लोग इसके पीछे राजनीति की आशंका भी जता रहे है। जिसके चलते आज जिला मुख्यालय पर भी चर्चाओं का दौर चलता रहा।
दोनों पक्ष जनता की सुविधा का हवाला दे रहे हैं, लेकिन आमने-सामने होने से न्यायिक काम प्रभावित हो रहा है, – एक ग्रामीण।
निष्कर्ष
गुढ़ागौड़जी तहसील का यह विवाद न्यायिक प्रक्रिया और स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में दोनों बार संघों की बातचीत और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर संपूर्ण जिले की निगाहें टिकी रहेंगी।
