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अज्ञानता जीवन में सबसे बड़ा शत्रु – धूपिया

झुंझुनूं, गांधी चौक स्थित सावित्री बाई फुले वाचनालय में महिला शिक्षा की जनक सावित्री बाई फुले की 193वीं जयंती मनाई गई। जिसके मुख्य अतिथि बीएसएनएल के सेवानिवृत्त एजीएम नेकीराम धूपिया थे। अध्यक्षता जगदीश प्रसाद ने की। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य विजय कुमार शर्मा, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता जलदाय विभाग घड़सीराम, इंद्राज सिंह सैनी, लक्ष्मण सैनी, एडवोकेट बजरंगलाल, लीलाधर थे। कार्यक्रम में सबसे पुराने पाठक जगदीश प्रसाद का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। पुस्तकालय प्रभारी द्वारिका प्रशाद सैनी ने सभी का स्वागत किया। मुख्य अतिथि धूपिया ने कहा कि अज्ञानता जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। इस शत्रु का नाश करने के लिए शिक्षा बहुत जरुरी है। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य शर्मा ने बताया कि शिक्षा और संस्कार दोनों एक साथ देना सावित्री बाई फुले की इनकी देन है। इन्होंने बहुत बड़ी सामाजिक बुराई को खत्म करने का बीड़ा उठाया। जिसे मिटाने के लिए देश में पहला बालिका विद्यालय खोला। इंद्राज सिंह सैनी ने भारत सरकार से ऐसी विभूति को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। कवि राजेश शर्मा ने कविता के माध्यम से बताया कि सावित्री बाई फुले जैसा फूल खिलता है करोड़ों में एक, जो बीज वसुदा को दे जाते हैं सुगंध आसमा को..। इससे पूर्व दीपिका, पूनम व किरण ने सरस्वती वंदना की। संचालन सुनीता दाधीच ने किया। राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने सभी का आभार जताया। अजय व राजेश सोनी ने व्यवस्था देखी।

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