मानवीय अनुभव और वैश्विक चुनौतियों पर दो दिवसीय मंथन
झुंझुनूं स्थित श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय में रामादेवी महिला पीजी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 27-28 मार्च को किया गया।
इस संगोष्ठी का विषय रहा — “मानवीय अनुभव और वैश्विक चुनौतियाँ: एक बहु-विषयक दृष्टिकोण”।
पहले दिन स्वास्थ्य और तकनीक पर चर्चा
पहले दिन मुख्य वक्ता डॉ. विषनावी डेसरआजू ने हेल्थ केयर सिस्टम और मेंटल हेल्थ पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और वैश्विक महामारियों के बीच प्रकृति और विकास के संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है।
वहीं डॉ. निधि अग्रवाल ने एआई और डिजिटल क्रांति के प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि तकनीक मानवीय मूल्यों को कैसे प्रभावित कर रही है।
दूसरे दिन संस्कृति और नैतिकता पर मंथन
संगोष्ठी के दूसरे दिन डॉ. जितेंद्र भीमराव बगुल ने भाषा, संस्कृति और वैश्वीकरण पर अपने विचार रखे।
डॉ. शिवाजी पाटिल ने मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की, जबकि डॉ. सीमा सहल ने नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया।
300 प्रतिभागी, 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत
इस संगोष्ठी में देशभर से 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
साथ ही 100 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।
आयोजन समिति का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रेसिडेंट डॉ. मधु गुप्ता ने कहा,
“ऐसे शैक्षणिक आयोजन भविष्य में भी जारी रहेंगे।”
कार्यक्रम संयोजक डॉ. धनेश कुमार मीणा ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि डॉ. नाजिया हुसैन ने तकनीकी समन्वय संभाला।
बड़ी संख्या में शिक्षाविद् रहे मौजूद
इस अवसर पर डॉ. शिवकुमार, डॉ. पिंकी, डॉ. अंशु, डॉ. सुमिता, डॉ. सविता संगवान, डॉ. अनन्ता शांडिल्य, डॉ. अंजना शर्मा, डॉ. आशा मिश्रा और डॉ. रमाकांत शर्मा सहित कई शिक्षाविद मौजूद रहे।
अंत में कुलसचिव डॉ. अजीत कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया।
