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मन के अन्धकार को मिटाने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है – देवकीनन्दन ठाकुर

जेजेटी भागवत कथा कलश यात्रा में उमड़ी भीड़

झुंझुनू, श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिंबरेवाला विश्वविद्यालय के खेल मैदान पर गुरुवार से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ जिसमें 201 महिलाओं ने कलश लेकर इस धार्मिक महोत्सव में भाग लिया कलश यात्रा में सजी-धजी बगिया घोड़े और ऊंट भी नजर आए वही बैंड बाजे के साथ बालाजी मंदिर से कलश यात्रा शुरू हुई जो कथा स्थल पर संपन्न हुई नाचते गाते श्रद्धालु एसएस मोदी व जीबी मोदी के बच्चों ने बैंड में डांडिया नृत्य किया और क्यों आतिशबाजी का नजारा भी देखने लायक था वहीं पुलिस की भी माकूल व्यवस्था थी कथावाचक देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज के पावन सानिध्य में झुंझुनू, राजस्थान में 24 से 30 नवम्बर तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसका यह प्रथम दिन था यह भागवत कथा 30 नवंबर तक चलेगी। श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरूआत विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज श्री ने सभी भक्तगणों को “राधे श्याम राधे श्याम, श्याम श्याम राधे राधे” भजन श्रवण कराया। कथा में मुख्य अतिथि के रूप में जेजेटी यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति विनोद टीबड़ेवाला , पुलिस महानिरिक्षक सुरेंद्र गुप्ता, बालकृष्ण, राजकुमार, रमाकांत ने पूज्य महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। जब तक हम अपनी संस्कृति और सनातन को नहीं समझेंगे तब तक हमारे बच्चे भी हमारी संस्कृति को नहीं समझेंगे। एक विश्वविद्यालय वो है जहाँ से हम डिग्री लेकर कमाने चले जाते है और एक भागवत विश्वविद्यालय हैं जहाँ से हमें डिग्रियां तो नहीं मिलती लेकिन इतना ज्ञान प्राप्त होता है जिससे हमें जॉब के साथ साथ भगवान से मिलने का मार्ग भी मिल जाता है।

जो मनुष्य इस लोक में भागवत कथा का श्रवण करते हैं और जिन मनुष्य के हृदय में भागवत के प्रति श्रद्धा होती है उनके पितृ सदैव उन पर प्रसन्न रहते हैं। मन के अन्धकार को मिटाने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है। बिना आध्यात्मिक ज्ञान के मन का अन्धकार नहीं मिट सकता है। एक मनुष्य के लिए 16 से 28 की उम्र सबसे महत्वपूर्ण होती है लेकिन आज कल का मनुष्य इसे व्यर्थ में नष्ट कर रहा है। वह इसे मोबाइल चलाने और टीवी देखने में नष्ट कर रहा है। तुमने जीवन में क्या किया, वही किया जो सभी करते हैं खाया, कमाया और सोये। ये काम तो पशु भी करते है, आप में और पशु में ये अंतर है कि आप भगवान का का भजन कर सकते है जबकि पशु भगवान की भक्ति नहीं कर सकते है, परोपकार नहीं कर सकते है। आज कल हमारे घर में पवित्रता नहीं रही है क्यूंकि हम जूते चप्पल पहनकर खाना खा लेते हैं, चमड़े की बैल्ट पहनकर खाना खाने बैठ जाते है। आज कल हमारे अंदर दया भी नहीं रही है हम किसी के चोट लग जाने पर पहले उसकी वीडियो बनाते है उसकी मदद नहीं करते है। जिस प्रकार हम फिल्म देखने के लिए थिएटर जाते हैं उसी प्रकार यदि आप भगवान को देखना चाहते है तो आपको भागवत कथा में जाना पड़ेगा। देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि एक बार सनकादिक ऋषि और सूद जी महाराज विराजमान थे तो उन्होंने ये प्रश्न किया की कलयुग के लोगों का कल्याण कैसे होगा? आप देखिये किसी भी पुराण में किसी और युग के लोगो की चिंता नहीं की पर कलयुग के लोगों के कल्याण की चिंता हर पुराण और वेद में की गई कारण क्या है? क्योकि कलयुग का प्राणी अपने कल्याण के मार्ग को भूल कर केवल अपने मन की ही करता है जो उसके मन को भाये वह बस वही कार्य करता है और फिर कलयुग के मानव की आयु कम है और शास्त्र ज्यादा है तो फिर एक कल्याण का मार्ग बताया भागवत कथा। श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है महाराज श्री ने कहा कि व्यास जी ने जब इस भगवत प्राप्ति का ग्रंथ लिखा, तब भागवत नाम दिया गया। बाद में इसे श्रीमद् भागवत नाम दिया गया। इस श्रीमद् शब्द के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा।

व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं बल्कि भागवत की मानों भी। सच्चा हिन्दू वही है जो कृष्ण की सुने और उसको माने , गीता की सुनो और उसकी मानों भी , माँ – बाप, गुरु की सुनो तो उनकी मानो भी तो आपके कर्म श्रेष्ठ होंगे और जब कर्म श्रेष्ठ होंगे तो आप को संसार की कोई भी वस्तु कभी दुखी नहीं कर पायेगी। और जब आप को संसार की किसी बात का फर्क पड़ना बंद हो जायेगा तो निश्चित ही आप वैराग्य की और अग्रसर हो जायेगे और तब ईश्वर को पाना सरल हो जायेगा। श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कपिल देवहूती संवाद, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र का वृतांत सुनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रवासियों में रामाकांत टीबड़ेवाला बाबूलाल ढ़ढाडारीया रामअवतार अग्रवाल विशाल टीबड़ेवाला बी के टीबड़े उमा टीबड़ेवाला हनुमान प्रसाद बगड़िया राधेश्याम जसरापुरिया लेखा अग्रवाल दीनदयाल मुरारका माया गुप्ता नेहा घई सहित गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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