शेखावाटी लाइव और शेखावाटी दर्पण ने उठाया था बड़ा मुद्दा
झुंझुनू, झुंझुनू जिला कलेक्टर डॉक्टर अरुण गर्ग ने कोतवाली झुंझुनू थाने का निरीक्षण किया। जिसके बाद सरकारी प्रेस नोट में यह सामने आया – जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने गुरुवार को शहर के पुलिस थाना कोतवाली का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने थाना परिसर, रिकॉर्ड संधारण, मालखाना, हवालात एवं साफ-सफाई की स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया।
जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा थाना स्तर पर कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम के लिए नियमित गश्त बढ़ाई जाए तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए।
जिला कलेक्टर ने कहा कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे आमजन में विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हो। उन्होंने थाना परिसर में स्वच्छता व रखरखाव की प्रशंसा की । इस दौरान थानाधिकारी श्रवण कुमार एवं थाना स्टाफ मौजूद रहे।
“सिर्फ प्रेस नोट वाले नहीं, असली औचक निरीक्षण होने चाहिए”
झुंझुनू जिला कलेक्टर ग्राउंड पर उतर कर थानों के भी हालत जानने को निकले यह एक अच्छी शुरुआत है लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हमने शेखावाटी लाइव और शेखावाटी दर्पण हमारे समाचार पत्र में प्रमुखता से इस मामले को उठाया था और इस पूरे मामले का मुख्य बिंदु था वह यह की “छपने वाले औचक निरीक्षण नहीं कार्यवाही वाले औचक निरिक्षण करो साहब” और एक विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन और पुलिस प्रशासन से जुड़ी हुई हमने पेश की थी।
इस पूरी विश्लेषणात्मक खबर में यह भी बताया गया था कि ईमानदारी से और वास्तविक रूप से औचक निरीक्षण व्यवस्थाओं में सुधार करने के लिए मील का पत्थर साबित होते हैं नहीं तो सिर्फ प्रेस नोट जारी करने के लिए किए जाने वाले औचक निरीक्षण सिर्फ कागजी औचक निरीक्षण ही बनकर रह जाते हैं जिससे ना तो व्यवस्था में कोई सुधार देखने को मिलता और ना ही आम आदमी को व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलता है। अब आने वाले दिनों में देखने वाली बात है कि यह निरीक्षण वास्तव में औचक होंगे या महज प्रेस नोट जारी करने तक ही सीमित हो जाएंगे। यदि वास्तविक औचक निरीक्षण होंगे तो प्रशासन और पुलिस प्रशासन की व्यवस्था और कार्य शैली में भी बदलाव आम जनता को देखने को मिलेगा।

अब असली सवाल: क्या बदलेगी व्यवस्था?
कलेक्टर का ग्राउंड पर उतरकर निरीक्षण करना एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:
- क्या ये निरीक्षण वास्तव में औचक होंगे?
- या फिर सिर्फ प्रेस नोट तक सीमित रह जाएंगे?
अगर निरीक्षण वास्तविक और सख्त हुए, तो आने वाले समय में प्रशासन और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और व्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है।

