
रास्ते का इतिहास और बंद होने का मामला
सत्यपाल ने बताया कि यह रास्ता खसरा नंबर 251 में दर्ज है और 30 जुलाई 2015 को उपखंड अधिकारी द्वारा सार्वजनिक आवागमन के लिए घोषित किया गया था।
रास्ता बंद होने के कारण वह खेत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और खेती-बाड़ी, खाद-बीज ले जाना एवं फसल निकालना मुश्किल हो गया है।
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रास्ता 26 अक्टूबर 2025 से बंद
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किसान ने 23 दिसंबर 2025 को उपखंड अधिकारी को आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई
प्रशासनिक कार्रवाई और ज्ञापन
सत्यपाल ने आरोप लगाया कि तहसीलदार सूरजगढ़ ने तीन बार पुलिस जाप्ता बुलाया, फिर भी रास्ता नहीं खुला।
22 जनवरी 2026 को उपखंड अधिकारी ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा, फिर भी 29 जनवरी 2026 तक कोई समाधान नहीं हुआ।
अब किसान परिवार सहित घर से बाहर निकलने में भी असमर्थ हैं और उन्होंने शीघ्र हस्तक्षेप कर रास्ता खुलवाने की मांग की है।
