भारतीय दर्शन और योग पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, छात्रों को मिला मार्गदर्शन
झुंझुनूं स्थित जेजेटी यूनिवर्सिटी में बुधवार को भारतीय दर्शन एवं योग विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया।
यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय और योग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
योग और दर्शन पर विशेषज्ञों के विचार
सेमिनार में वक्ताओं ने योग और भारतीय दर्शन की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की।
ऑनलाइन जुड़े रामनारायण मिश्र ने कहा कि
“योग का भारतीय दर्शन से गहरा संबंध है, जो व्यक्ति के मन, बुद्धि और कर्म को संतुलित करता है।”
उन्होंने भारत को विश्व गुरु बताते हुए कहा कि विश्व दर्शन दिवस भी भारत की देन है।
योग है जीवन का आधार
हरियाणा से आईं डॉ. सुमन रानी ने कहा कि
“दर्शन और योग ही जीवन का आधार हैं, बिना शारीरिक उन्नति के समाज का विकास संभव नहीं।”
उन्होंने नैतिकता, संस्कार और कर्म में कुशलता को योग की सफलता का आधार बताया।
योग अभ्यास से हुई शुरुआत
सेमिनार संयोजक डॉ. संजय सिंह ने कार्यक्रम की शुरुआत योग अभ्यास से करवाई।
उन्होंने उपस्थित लोगों से एकाग्रचित होकर सेमिनार का लाभ उठाने का आह्वान किया।
योग से जीवन में अनुशासन और संतुलन
यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट डॉ. मधु गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि
“योग स्वयं तक पहुंचने की यात्रा है, जो व्यक्ति को अनुशासन और संतुलन सिखाता है।”
उन्होंने जीवन को प्रैक्टिकल तरीके से जीने और आध्यात्मिकता अपनाने पर जोर दिया।
अतिथियों का सम्मान और सहभागिता
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ।
इस दौरान अतिथियों को दुपट्टा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
सेमिनार में डॉ. अजीत कुमार, डॉ. नाजिया हुसैन, डॉ. अमन गुप्ता, डॉ. अरुण कुमार पीआरओ डॉ. रामनिवास सोनी सहित कई शिक्षक और विश्वविद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।
