झुंझुनूं, सीकर और चूरू की जीवनदायिनी काटली नदी को बचाने के लिए
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने बड़ा आदेश दिया है।
अब 2 माह के भीतर नदी के बहाव क्षेत्र का सीमांकन कर
सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे।
जल निकायों की सुरक्षा पर जोर
NGT ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि
नदी के प्राकृतिक बहाव को बहाल किया जाए
जल निकायों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए
यह आदेश Execution Application (प्रकरण 59/2024) के तहत लागू किया गया है।
पहले से कई जगह हटाए गए अतिक्रमण
उदयपुरवाटी
- बागोली और काटलीपुरा में 34 अतिक्रमण हटाए गए
- 13 दुकानें और 1 पक्का मकान शामिल
गुढ़ा गौड़जी
- कुल 108 में से 95 अतिक्रमण हटाए गए
- कई मामलों में फसलों की नीलामी कर कार्रवाई
झुंझुनूं (भादुंडा कलां)
- तारबंदी और निर्माण हटाए गए
चिड़ावा
- 20 अतिक्रमण चिन्हित
- राजस्व अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी
चूरू (हमीरवास बड़ा)
- अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए
खेतड़ी
- यहां कोई अवैध अतिक्रमण नहीं मिला
कुछ जगह पुनर्वास के बाद हटेंगे अतिक्रमण
गुढ़ा गौड़जी क्षेत्र में
कालबेलिया और बंजारा समुदाय के 13 मकान अभी शेष हैं
प्रशासन द्वारा इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है,
जिसके बाद इन्हें हटाया जाएगा।
ड्रोन सर्वे और जन अभियान का असर
“काटली नदी बचाओ जन अभियान” के तहत
नदी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे भी करवाया गया है
सयोजक सुभाष कश्यप के अनुसार,
“अब सरकार और जनता के सहयोग से नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा।”
2 महीने की डेडलाइन, अधिकारियों को निर्देश
राज्य सरकार ने NGT को आश्वासन दिया है कि
शेष सभी अतिक्रमण 2 माह में हटाए जाएंगे
ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि:
- नदी क्षेत्र का सीमांकन करें
- अतिक्रमण की पहचान करें
- जल संरक्षण सुनिश्चित करें
शेखावाटी के लिए क्यों अहम है फैसला
काटली नदी
शेखावाटी क्षेत्र की जल जीवन रेखा मानी जाती है
इस फैसले से:
- जल स्तर में सुधार
- पर्यावरण संरक्षण
- भविष्य की जल योजनाओं को मजबूती
मिलने की उम्मीद है।
