राजस्थान के सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले की काटली नदी, जो कभी इस क्षेत्र की जल जीवन रेखा मानी जाती थी, आज धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।
वर्तमान पीढ़ी इस नदी को अब सिर्फ कहानियों में ही सुन रही है
इन कारणों से खत्म हो रही नदी
काटली नदी के सूखने के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं:
वैध-अवैध खनन
अतिक्रमण और जल मार्ग बदलना
नदी के उद्गम और नालों पर कब्जा
एनीकट और बांध निर्माण
अत्यधिक जल दोहन
वन और जैव विविधता में कमी
“काटली नदी बचाओ जन अभियान” की शुरुआत
सरस्वती रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट सोसायटी, झुंझुनूं द्वारा
“काटली नदी बचाओ जन अभियान” शुरू किया गया है
अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने
मुख्यमंत्री सहित विभिन्न विभागों को ज्ञापन सौंपे
NGT (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) में याचिका दायर करवाई
NGT के आदेश के बाद बढ़ी उम्मीद
अमित कुमार और कैलाश मीणा द्वारा दायर याचिका पर
NGT ने नदी संरक्षण के लिए रास्ता खोला
इसके बाद
- ड्रोन सर्वे कराया गया
- अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई
सिंधु जल लाने की उठी बड़ी मांग
अभियान में अब एक बड़ी मांग सामने आई है:
सिंधु जल समझौते का पानी काटली नदी में लाया जाए
इसके लिए
- जोधपुरा सुनारी
- हीरवाना
- मैनपूरा
- बगड़
क्षेत्र में कच्चे बांध बनाकर पानी लाने का प्रस्ताव दिया गया है
80 लाख लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
यदि यह योजना सफल होती है तो:
80 लाख से अधिक लोगों को लाभ
जल संकट से राहत
पर्यावरण और जैव विविधता में सुधार
स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
पीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन
अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने बताया कि
जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर
इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव सौंपा जाएगा
जनता से जुड़ने की अपील
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा:
“यह जन-जन का अभियान है, इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।”
मीडिया और सामाजिक संगठनों के सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया गया
