Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / पत्नी की दहेज के लिये हत्या के आरोपी पति को आजीवन कारावास

पत्नी की दहेज के लिये हत्या के आरोपी पति को आजीवन कारावास

झुंझुनूं जिला एवं सेंशन न्यायाधीश देवेन्द्र दीक्षित द्वारा

झुंझुनूं, झुंझुनूं जिला एवं सेंशन न्यायाधीश देवेन्द्र दीक्षित द्वारा गुरूवार को दिये एक निर्णय में अपनी पत्नी की दहेज के लिये हत्या के आरोपी सुरज्ञानमल पुत्र किशोर मल निवासी वार्ड नम्बर 25 कुंआ खातेड़ा तन उदयपुरवाटी को आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया है। मामले के अनुसार 1 अगस्त 2019 को हरसाराम सैनी पुत्र हरदेवाराम निवासी रेबारियों की ढ़ाणी पहाडि़ला ने एक रिपोर्ट पुलिस थाना उदयपुरवाटी पर दी कि उसकी भतीजी मृतका पुत्री सीताराम व अंजू पुत्री सीताराम का विवाह करीब 3-4 वर्ष पूर्व सुरज्ञान पुत्र किशोरीलाल व मक्खनलाल पुत्र किशोरीलाल के साथ सम्पन्न हुआ था। उसकी भतीजी मृतका व दूसरी भतीजी अंजू के साथ ससुर किशोरी, मृतका का पति सुरज्ञान व ननद विवाह के पश्चात से लकडिय़ों व बेल्ट से मारपीट करते आ रहे थे और दहेज के लिये भी काफी समय से हैरान व परेशान कर रहे थे। दहेज नही लाने पर जान से मारने की धमकी दे रहे थे। 1 अगस्त 2019 को प्रात: उसे मालूम हुआ कि मृतका को उसके ससुराल वालो ने मार दिया है और परिवार को बिना सूचना दिये उसका अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे है। उक्त लोगो ने मृतका की दहेज को लेकर हत्या कर दी है और दूसरी भतीजी अंजू को भी मारने की फिराक में है आदि। पुलिस ने मामला दर्ज कर बाद जांच सुरज्ञानमल के विरूद्ध धारा 304बी व 498ए में सम्बन्धित न्यायालय में चालान पेश कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक भारत भूषण शर्मा ने इस्तगासा पक्ष की और से कुल 16 गवाहान के बयान करवाये तथा 25 दस्तावेज प्रदर्शित करवाये गये। लोक अभियोजक भारत भूषण शर्मा ने न्यायालय में तर्क दिया कि पत्रावली पर आयी साक्ष्य से यह साबित है कि आरोपी सुरज्ञानमल व उसके परिवार वालो ने मृतका को शादी के बाद से ही मृत्यु के कुछ समय पूर्व तक दहेज की मांग के लिये प्रताडि़त किया था तथा अपनी पत्नी की दहेज के लिये हत्या कर पति ने यह जघन्य काण्ड किया है। इसलिये पति सुरज्ञान को सख्त से सख्त सजा दी जाये। न्यायाधीश ने पत्रावली पर आयी साक्ष्य का बारिकी से विश्लेषण करते हुये आरोपी पति सुरज्ञानमल को उक्त सजा के साथ-साथ धारा 498ए के आरोप में भी 3 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5 हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित करते हुये दोनो मूल सजायें साथ-साथ चलने के आदेश दिये। साथ ही न्यायालय ने तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुये मृतका के परिवारवालो को प्रतिकर दिलाये जाने हेतु अनुशंषा भी की।

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