Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / शहीद करतार सिंह सराभा का बलिदान दिवस मनाया

शहीद करतार सिंह सराभा का बलिदान दिवस मनाया

आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में

झुंझुनू, आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में शिक्षाविद् रामस्वरूप आसलवासिया के नेतृत्व में देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले महान क्रांतिकारी, शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्श अमर शहीद सरदार करतार सिंह सराभा का बलिदान दिवस मनाया। शहीद करतार सिंह सराभा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने कहा- देश के युवाओं के लिए शहीद भगत सिंह सबसे बड़े आदर्श हैं, पर स्वयं भगत सिंह जिन्हें अपना आदर्श मानते थे, उनके बारे में बहुत कम लोग जानतें हैं। भगत सिंह का आदर्श कोई बुजुर्ग साधु-संन्यासी, कोई राजनेता या कोई आध्यात्मिक व्यक्तित्व नहीं था, बल्कि 19 साल का एक क्रांतिकारी युवक था। भगत सिंह अपनी जेब में 19 साल के इस क्रांतिकारी युवक की तस्वीर रखा करते थे और उसकी तस्वीर के सामने माल्यार्पण कर अपनी किसी सभा या जलसे की शुरुआत करते थे। वह क्रांतिकारी युवक कोई और नहीं बल्कि 19 वर्ष की अल्पायु में देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूमने वाले महान क्रांतिकारी अमर शहीद करतार सिंह सराभा थे। भारत के क्रान्तिकारियों में सरदार करतार सिंह सराभा एक ऐसा नाम है, जो शौर्य, साहस, त्याग और बलिदान के लिए सदा याद किया जायेगा। 16 नवम्बर, 1915 को करतार सिंह सराभा हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गये। जज ने उनके मुकदमे का निर्णय सुनाते हुए कहा था, “इस युवक ने अमेरिका से लेकर हिन्दुस्तान तक अंग्रेज़ शासन को उलटने का प्रयास किया। इसे जब और जहाँ भी अवसर मिला, अंग्रेज़ों को हानि पहुँचाने का प्रयत्न किया। इसकी उम्र बहुत कम है, किन्तु अंग्रेज़ी शासन के लिए बड़ा भयानक है।” भारतीय इतिहास सुनहरा है और देश के लिए अनेक कुर्बानी देने वाले शहीदों से सुशोभित है। अंग्रेजों की गुलामी के दौर में देश की आजादी के लिए बेशकीमती संघर्षों व कुर्बानियों से देश के इतिहास के पन्ने स्वर्णिम अक्षरों से भरे पड़े हैं। इन्हीं महान शूरवीरों में सरदार करतार सिंह सराभा के साथ फांसी के फंदे पर चढ़ने वाले छह अन्य क्रांतिकारियों के नाम शामिल हैं। क्रांतिकारी बख्शीश सिंह, हरनाम सिंह, जगत सिंह, सुरैण सिंह, सुरैण व विष्णु गणेश पिंगले को करतार सिंह सराभा के साथ 16 नवंबर 1915 को लाहौर जेल में अंग्रेजी हुक़ूमत ने फांसी पर चढ़ा दिया था। सभी क्रांतिवीरों को शहीद करतार सिंह सराभा के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर भीष्म देव आर्य बुहाना, भगवान सिंह चुड़ीना, रामस्वरूप आसलवासिया, धर्मपाल गांधी, सुनिल गांधी, रणवीर सिंह, सतीश कुमार, अंजू गांधी आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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