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मणिपुर मामले के विरोध में उपखंड अधिकारी सूरजगढ़ को राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

झुंझुनू, आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में मणिपुर राज्य में हो रही हैवानियत और हिंसा के विरोध में जाट महासभा के अध्यक्ष जगदेव सिंह खरड़िया के नेतृत्व में सूरजगढ़ उपखंड अधिकारी कविता गोदारा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर तुरंत प्रभाव से हिंसा को रोकने और मणिपुर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग उठाई है। वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार सैनी व जगदेव सिंह खरड़िया ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति को अवगत करवाया गया है कि लगभग 3 महीने से मणिपुर में हिंसा का तांडव हो रहा है। हजारों की भीड़ लोगों के घर जला रही है, महिलाओं के साथ बलात्कार कर उन्हें जिंदा जलाया जा रहा है, निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है, पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में बलात्कार, आगजनी और गैंगरेप जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। कई जगह पुलिस भी उपद्रवियों के साथ खड़ी है। मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री की चुप्पी दर्शा रही है कि उपद्रवियों को सरकार का संरक्षण हासिल है। ढाई महीने पहले मणिपुर की महिलाओं ने केंद्र सरकार और महिला आयोग से हिंसा की शिकायत कर मदद मांगी थी लेकिन किसी ने कोई सहयोग नहीं किया। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी ने कहा- काफी समय से मणिपुर में हिंसा और हैवानियत का तांडव हो रहा है। समय रहते हिंसा को रोका जाता तो बहुत सी महिलाओं की आबरू बचाई जा सकती थी, बहुत से लोगों का जीवन बचाया जा सकता था। सरकार हिंसा रोकने में नाकाम रही है, हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गये, हजारों की संख्या में गंभीर रूप से घायल हो गये। उपद्रवियों ने पीड़ित परिवारों के पालतू पशुओं को भी मार दिया। अनगिनत महिलाओं के साथ बलात्कार और गैंगरेप जैसी घटनाएं हुई हैं। महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़कों पर घुमाया जा रहा है, गैंगरेप के बाद महिलाओं को जिंदा जलाया जा रहा है।

अभी तक मणिपुर हिंसा की भयावह खबर जो सामने आई है, 15 मई को इंफाल ईस्ट में 18 साल की लड़की के अपहरण और गैंगरेप की बात सामने आई है। 5 मई को 21 साल और 24 साल की युवतियों को बलात्कार के बाद मौत के घाट उतार दिया। 21 साल की युवती को गैंगरेप के बाद जिंदा जलाने की खबर आ रही है। 6 मई को 45 साल की महिला को निर्वस्त्र कर उसे जिंदा जलाया गया। एक स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी 80 साल की महिला को भी जिंदा जलाया गया है। 4 जून को एक एंबुलेंस में मां बेटे सहित तीन लोगों को जिंदा जला दिया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार मौन रहकर ऐसी घटनाओं का समर्थन कर रही है। मणिपुर हिंसा पर 3 महीने से प्रधानमंत्री ने चुप्पी साध रखी है। घर में आग लगी हुई है और प्रधानमंत्री विदेशों की सैर कर रहे हैं, देश में आने पर चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे हैं लेकिन मणिपुर हिंसा का जिक्र तक नहीं कर रहे हैं। अगर केंद्र सरकार चाहती तो हिंसा को रोका जा सकता था। देश निश्चित ही गैर जिम्मेदार लोगों के हाथ में हैं। महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग व एससी/एसटी आयोग सभी को भंग किया जाना चाहिए। इन आयोगों में बैठे लोग किसी काम के नहीं हैं। शिक्षाविद् राजपाल फौगाट ने कहा- मणिपुर राज्य में 3 महीने तक हिंसा का तांडव होना और प्रधानमंत्री का मौन रहना, शर्म की बात है। प्रधानमंत्री अपने आप को चौकीदार बताते हैं और ऐसी घटनाओं पर मौन रहते हैं। सत्ता के भूखे लोग झूठ और नफरत फैला रहे हैं, देशवासियों को गुमराह कर रहे हैं। मणिपुर में हो रही भयावह घटनाओं को देशवासियों से छुपा रहे हैं। मणिपुर राज्य में हो रही घटनाओं पर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उपद्रवी पुलिस के हथियार तक लूट रहे हैं। हम ज्ञापन के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि मणिपुर में जंगलराज समाप्त किया जाये और राज्य में शांति कायम करने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाये। ज्ञापन देने वालों में गांधी जीवन दर्शन समिति सूरजगढ़ के संयोजक एडवोकेट दीपक कुमार सैनी, शिक्षाविद् राजपाल फौगाट, ओमप्रकाश सेवदा, एडवोकेट सोमवीर खीचड़, एडवोकेट मदन सिंह राठौड़, जगदेव सिंह खरड़िया, धर्मपाल गाँधी, जयप्रकाश, बनवारी भाम्बू, करण सिंह दिवाच, साँवरमल, कामरेड हुकम सिंह झांझड़िया, नवदीप खरड़िया, राजेंद्र कुमार, दिनेश आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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