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Video News: झुंझुनू:अब नितिन गडकरी से न्याय की उम्मीद,बोले बहुत हुआ..

झुंझुनूं में एनएच-11 चौड़ीकरण मुआवजा विवाद, नितिन गडकरी को भेजा ज्ञापन

दुर्जनपुर गांव की 12 बीघा भूमि के मुआवजे पर डीएलसी दरों में भेदभाव का आरोप

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झुंझुनूं जिले में जारी एनएच-11 चौड़ीकरण कार्य के दौरान भूमि अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण को लेकर किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों ने इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नाम ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है।

किसानों का कहना है कि हाईवे अथॉरिटी और राजस्व विभाग ने नियमों के विपरीत तरीके से मुआवजा तय किया, जिससे स्थानीय किसानों को न्यायसंगत राशि नहीं मिली और उनकी उपजाऊ भूमि का नुकसान हो गया।


दुर्जनपुर की 12 बीघा भूमि और डीएलसी दरों का विवाद

किसानों का आरोप है कि हाईवे अथॉरिटी व राजस्व विभाग द्वारा ग्राम दुर्जनपुर में अधिग्रहित लगभग 12 बीघा भूमि का मुआवजा चार प्रकार की डीएलसी दरों के आधार पर दिया गया, जबकि पीडब्ल्यूडी विभाग ने मनमाने तरीके से सामान्य डीएलसी दर लागू कर दी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने अपने स्तर पर सामान्य डीएलसी दर को लागू कर दिया, जिससे कृषि भूमि की वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले काफी कम मुआवजा मिला और किसानों को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।


आउट प्लान से अलग रेंज मोड़ने का आरोप

किसानों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी आउट प्लान के अनुसार हाईवे का निर्माण रेंज 43-600 से 44-300 तक बिना किसी घुमाव के होना था। लेकिन स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग ने कथित दबाव में आकर हाईवे की रेंज को मोड़ दिया।

किसानों का आरोप है कि इस बदलाव के कारण हाईवे का ट्रैक कुछ ऐसे हिस्सों से निकाला गया, जहां उपजाऊ कृषि भूमि अधिक थी, जबकि पहले की योजना में इसे बचाया गया था। इससे प्रभावित किसानों की जमीन सीधे सड़क के नीचे आ गई और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया।


प्रशासनिक दबाव, पुलिस कार्रवाई और पाबंदी

किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सरकारी आदेश और आउट प्लान दिखाकर आपत्ति दर्ज करानी चाही, तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि विरोध दर्ज कराने पहुंचे किसानों को पुलिस बल के साथ थाने बुलाकर बैठाया गया और उन पर दबाव बनाया गया।

किसानों के मुताबिक, कुछ लोगों को छह माह के लिए पाबंद कर दिया गया, ताकि वे पुनः विरोध न कर सकें और मुआवजा व रेंज परिवर्तन के मुद्दे को आगे न बढ़ा पाएं। किसानों ने इसे अधिकारों के दमन की कार्रवाई बताते हुए केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।


किसानों की मांग: जांच, समान मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने मांग की है कि दुर्जनपुर क्षेत्र में अधिग्रहित भूमि के लिए लागू की गई डीएलसी दरों की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए और सभी किसानों को एक समान व न्यायोचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, आउट प्लान से हटकर किए गए रेंज परिवर्तन की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

किसानों ने दोषी माने जा रहे राजस्व व स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, पुलिस द्वारा की गई कथित ज्यादती की समीक्षा करने और भविष्य में किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की मांग की है।