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पंचायतों में आवश्यक खर्चों का टोटा

कोरोना संकट के कारण

झुंझुनूं,कोरोना संकट के कारण जिले की पंचायतीराज संस्थाओं का नियमित बजट गड़बड़ा गया है। गत वर्ष तक जहाँ जिले की प्रत्येक पंचायत केंद्र तथा राज्य सरकार से प्राप्त अनुदानों, सांसद तथा विधायक कोष, स्वच्छ भारत मिशन, जन सहभागिता योजना, पंचायत सशक्तिकरण योजना, आदि से औसत प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये विकास कामों के नाम पर खर्चा करती थी, इस बर्ष एक चौथाई भी मिलने की संभावना नही है। जिले की ग्राम पंचायतों को मिलने वाली सालाना राशि मे से करीब 5 करोड़ लोक सभा तथा राज्यसभा के सांसदों से, करीब 12 करोड़ जिले के 7 विद्यायकों से, 150 करोड़ वित्त आयोग की अभिशंसा से केंद्रीय व राज्य अनुदानों से,50 करोड़ स्वच्छ भारत मिशन से तथा 10 करोड़ पंचायत सशक्तिकरण व जनसहभागिता योजना से प्राप्त होते थे। इस वर्ष सांसद कोष को आगामी 2 साल के लिये फ्रीज़ कर दिया गया है तथा विधायक कोष को केवल चिकित्सा ढांचे के लिये एंगेज कर दिया गया है। राज्य वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली गत वर्ष की क़िस्त स्थगित कर दी गई है तथा चालू साल की क़िस्त की आशा भी कोरोना संकट के कारण धूमिल हो गई है। गतवर्ष तक ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने राज्य अनुदानों से जगह जगह नलकूप व पाइप लाइने स्थापित कर खूब जलदोहन किया स्वयं द्वारा पैदा की गई समस्या के निराकरण हेतु गलियों में सोख्ता गड्ढों ,सीमेंटेड सड़क, नालियों तथा कीचड़ निस्तारण के नाम पर खूब राशि खर्च की। चालू साल में पूर्व वर्षो की तुलना में एक चौथाई भी राशि प्राप्त होने की संभावना के मद्देनजर जिला परिषद के सीईओ रामनिवास जाट द्वारा सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिवों तथा विकास अधिकारियों को पाबन्द किया गया है कि जल प्रदाय योजनाओं पर विद्युत खर्च आधा किया जावे तथा कर्मचारियों के वेतन या मानदेय के अलावा किसी प्रकार का कोई खर्च नही किया जाए।

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