चयन तिथि अंकन को लेकर रेसा-पी का ज्ञापन, 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद प्रधानाचार्य (रेसा-पी) की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर सोमवार को झुंझुनूं जिला इकाई ने पदोन्नत प्रधानाचार्यों की चयन तिथि अंकन की वर्षों से लंबित प्रक्रिया को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन शिक्षा मंत्री राजस्थान, अतिरिक्त शिक्षा सचिव (स्कूल शिक्षा) तथा निदेशक माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर के नाम सौंपा गया।
सात दिन का अल्टीमेटम, फिर बीकानेर में घेराव
रेसा-पी ने ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर चयन तिथि अंकन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो 8 जून 2026 को शिक्षा निदेशालय बीकानेर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
संगठन ने यह भी कहा कि इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
वर्षों से लंबित है चयन तिथि अंकन
रेसा-पी के जिला मंत्री डॉ. मनीष कुमार चाहर ने बताया कि शिक्षा मंत्री और शासन स्तर से कई बार निर्देश जारी होने के बावजूद सत्र 2015-16 से 2019-20 तक पदोन्नत प्रधानाचार्यों की चयन तिथि अंकन प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा कि इससे हजारों प्रधानाचार्यों में नाराजगी और निराशा का माहौल है।
8000 से अधिक प्रधानाचार्य प्रभावित
डॉ. चाहर के अनुसार 7 दिसंबर 2022 को केवल सत्र 2017-18 में पदोन्नत 1970 प्रधानाचार्यों की चयन तिथि 1 अप्रैल 2017 अंकित करने के आदेश जारी हुए थे।
इनमें 1463 प्रधानाध्यापक पद से तथा 507 प्राध्यापक पद से पदोन्नत प्रधानाचार्य शामिल थे। जबकि अन्य वर्षों में पदोन्नत हजारों प्रधानाचार्यों के मामले अब भी लंबित हैं।
उन्होंने बताया कि 3 मार्च 2015 को वित्त विभाग द्वारा 4999 प्रधानाचार्य पदों की स्वीकृति जारी की जा चुकी थी, लेकिन निदेशालय स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
वेतन, पेंशन और एरियर पर पड़ रहा असर
रेसा-पी ने दावा किया कि चयन तिथि अंकन लंबित रहने के कारण कई प्रधानाचार्यों के वेतन निर्धारण, एरियर, पेंशन और अन्य सेवा लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
संगठन ने बताया कि वित्त विभाग के 5 मई 2026 के परिपत्र और माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 22 मई 2026 के आदेशों के तहत वेतन निर्धारण की पुनः जांच की जानी है। ऐसे में चयन तिथि अंकन नहीं होने से आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
अधिकारियों पर लगाई शिथिलता का आरोप
रेसा-पी ने आरोप लगाया कि शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश मिलने के बावजूद निदेशालय के संबंधित अनुभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की शिथिलता के कारण यह प्रक्रिया वर्षों से लंबित है।
संगठन ने सरकार से जल्द निर्णय लेकर प्रभावित प्रधानाचार्यों को राहत देने की मांग की।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान रेसा-पी के वरिष्ठ सदस्य एवं संरक्षक मनीराम मंडीवाल, बूटीराम मोटसरा, उम्मेद महला, राजबाला खीचड़, विनोद लोहिया, संजीव टांडी, हरिसिंह कुल्हरी, सुरभि गुप्ता, मधु शर्मा, सुमन गोदारा, राकेश कुमारी, ललिता, सुमन थाकन, गरिमा चाहर, मणि देवी, फूल कुमारी, अनुज लमोरिया और बबीता सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।





