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Jhunjhunu News: झुंझुनू: पांच जिला कलेक्टरों के सामने आया मामला, दो ने करवाया पुनः स्मरण = परिणाम शून्य

ऐसी क्या मजबूरी ? झुंझुनू में जिला कलेक्टर पर उपखंड अधिकारी भारी

आरटीआई गोपनीयता भंग मामला
झुंझुनू
, झुंझुनू जिला मुख्यालय पर एक लंबित मामला सालो से फाइलो से ही बाहर नहीं आ पा रहा है। यह मामला पांच अलग-अलग जिला कलेक्टर के सामने लाया गया। इसमें से दो तत्कालीन झुंझुनू जिला कलेक्टर्स ने उपखंड अधिकारी झुंझुनू को इस मामले को लेकर पुनः स्मरण करवाकर शीघ कार्रवाई के लिए भी लिखा लेकिन नतीजा फिर भी शून्य ही साबित हुआ। हम बात कर रहे हैं झुंझुनू के आरटीआई से जुड़े हुए एक मामले की। जिसमें आरटीआई आवेदन की गोपनीयता सोशल मीडिया पर भंग की गई थी। इस तथ्य में बड़ी बात है कि उस समय मांगी गई सूचना तो आवेदक को उपलब्ध नहीं करवाई गई बल्कि उससे पहले ही आवेदन पत्र की फोटो सोशल मीडिया पर डालकर उसको वायरल कर गोपनीयता भंग करने का कृत्य किया गया।

यह भी मामला किसी आम व्यक्ति से जुड़ा हुआ नहीं था जिला मुख्यालय के एक पत्रकार से जुड़ा हुआ था इसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं होना सिस्टम पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि झुंझुनू के पत्रकार नीरज कुमार सैनी द्वारा जुलाई 2023 में आरटीआई आवेदन पत्र की गोपनीयता भंग होने के मामले में कार्रवाई के लिए ज्ञापन दिया गया था। बता दे कि पत्रकार सैनी द्वारा लोक सूचना अधिकारी जिला कलेक्टर झुंझुनू से आरटीआई कानून के अंतर्गत सूचना मांगी गई थी। परंतु आवेदन के कुछ दिन बाद ही सोशल मीडिया के व्हाट्सएप ग्रुप में मूल आवेदन की फोटो खींचकर वायरल कर दिया गया था तथा उसके साथ-साथ पत्रकार सैनी के खिलाफ अशोभनीय बातें लिखी गई थी और उन पर लगातार दबाव बनाकर प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया था। इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था जिसकी प्रति मुख्य न्यायाधीश राजस्थान उच्च न्यायालय खंडपीठ जयपुर, सूचना आयुक्त सूचना आयोग जयपुर, मुख्य सचिव राजस्थान सरकार जयपुर, प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली, केंद्रीय सूचना आयुक्त केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली, जिला पुलिस अधीक्षक झुंझुनू को भी भेजी गई थी। जिसके चलते 10- 8 -2023 को जांच उपखंड अधिकारी झुंझुनू को सौंपी गई थी लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर पुनः सैनी द्वारा समय – समय पर तत्कालीन झुंझुनू जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन दिए गए थे। इस पूरे मामले में अभी तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है । साथ ही 20-10 -2023 को तत्कालीन जिला कलेक्टर बचनेश कुमार अग्रवाल के द्वारा पत्रकार सैनी को पत्र भेजा गया था जिसमें एक बार पुनः उपखंड अधिकारी झुंझुनू को इस मामले की जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए लिखा गया था। मामले में उस समय तक जांच में क्या प्रगति हुई इस बारे में कोई जानकारी नहीं उपलब्ध करवाई गई है। वही ज्ञापन का दौर भी झुंझुनू के जिला कलेक्टर बदलने के साथ चलता रहा। इसी क्रम में तत्कालीन समय कलेक्टर कार्यालय से 17/10/2024 को एक बार पुनः उपखंड अधिकारी झुंझुनू को लिखा गया कि परिवाद पर आपको जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच रिपोर्ट चाही गई थी इसके पश्चात स्मरण पत्र भी जारी किया गया था लेकिन आप द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। उक्त परिवाद में अंकित तथ्यों के संबंध में अविलंब जांच कर जांच रिपोर्ट इस कार्यालय में भिजवाना सुनिश्चित करें। लेकिन इसके बावजूद फिर से इस मामले को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया है। इसके बाद अब झुंझुनू जिले की कमान डॉक्टर अरुण गर्ग ने संभाली तो पत्रकार सैनी द्वारा संपूर्ण दस्तावेजों के साथ एक बार फिर से इस जांच को आगे बढ़ाने के संदर्भ में ज्ञापन सोपा गया लेकिन अभी तक किसी भी तरह से उनको कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है कि इस मामले में कोई प्रगति हुई भी है या नहीं।

इस प्रकार से झुंझुनू के जिला कलेक्टर डॉ खुशाल यादव, बचनेश कुमार अग्रवाल, चिन्मयी गोपाल, रामावतार मीणा और वर्तमान में डॉक्टर अरुण गर्ग के सामने यह मामला लाया जा चुका है। इसमें से तत्कालीन जिला कलेक्टर बचनेश कुमार अग्रवाल और रामावतार मीणा ने उपखंड अधिकारी झुंझुनू को इस मामले में अविलम्ब कार्रवाई करके जांच भिजवाने के लिए लिखा गया था। लेकिन झुंझुनू उपखंड अधिकारी कार्यालय से यह जांच आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही है।

जानकारी थी इससे संबंधित

पत्रकार सैनी द्वारा जो झुंझुनू जिला कलेक्टर कार्यालय में आरटीआई के अंतर्गत सूचना मांगी गई थी वह सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी झुंझुनू हिमांशु सिंह सैनी से संबंधित थी और इसमें एक बिंदु में यह पूछा गया था कि झुंझुनू जिला कलेक्टर कार्यालय में कितने ऐसे कर्मचारी और अधिकारी हैं जोकि डेपुटेशन पर डटे हुए हैं और सरकार के डेपुटेशन के संदर्भ में क्या दिशा निर्देश हैं। दोनों बिंदुओं से संबंधित जानकारी तो पत्रकार को उपलब्ध नहीं करवाई गई लेकिन आवेदन करने के कुछ दिन बाद ही इसको सोशल मीडिया के व्हाट्सएप ग्रुप में डालकर पत्रकार के खिलाफ अशोभनीय बातें भी लिखी गई और इसके उपरांत विभिन्न प्रकार से इनके ऊपर दबाव भी डाला गया। इसी आरटीआई मूल आवेदन की गोपनीयता भंग होने के संदर्भ में कार्रवाई करने के लिए गुहार लगाई गई थी लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी सिस्टम की पराकाष्ठा तो देखिए जिला कलेक्टर कार्यालय और झुंझुनू उपखंड अधिकारी के कार्यालय एक ही परिसर में स्थित होने के बावजूद भी मामला इतने लंबे समय से खींचता हुआ चला आ रहा है।

कैसी है सिस्टम की मजबूरी ?

दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस सरकार के समय इस जांच को रोकने के लिए राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। वहीं पत्रकार सैनी पर भी सामाजिक व अन्य तरीकों से दबाव बनाने का कुप्रयास किया गया। जब सरकार बदली तो लगा कि अब सिस्टम की कार्य शैली में भी बदलाव होगा सूत्रों के अनुसार इसके बावजूद भी जिन लोगों के हित इस मामले से जुड़े हुए थे उन्होंने भी भाजपा के बड़े पदों पर आसीन नेताओं से सांठगांठ कर ली जिसके चलते यह जांच वही रुकी हुई है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ऐसे किसी भी अधिकारी ने हिम्मत दिखाकर नियामानुसार इस मामले का निपटारण करने की जहमत नहीं उठाई। जिसके पीछे राजनीतिक दबाव होने की ही आशंका ज्यादा व्यक्त की जा रही है। वहीं स्थानीय स्तर का ही यह मामला था और स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर ही यह लोग बैठे हुए हैं जिसके चलते भी इस जांच को आगे बढ़ने से लगातार रोका जा रहा है और पत्रकार सैनी को तत्कालीन समय उपखंड अधिकारी कार्यालय के एक कर्मचारी ने ऑफ रिकॉर्ड इस बात से अवगत करवा दिया गया था कि उन पर दबाव बहुत ज्यादा है।
वही उपखंड अधिकारी कार्यालय झुंझुनू द्वारा पत्रकार सैनी के बयान दर्ज करवाने के लिए भी बार-बार चक्कर कटवाए गए लेकिन दूसरी तरफ के पक्ष से जुड़े हुए जो लोग थे उनको बुलाकर कार्रवाई करने की जहमत उठाई गई या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है। जांच इस मामले पर कहां तक पहुंची या शुरू भी हुई या नहीं ?पत्रकार को आज तक भी अवगत नहीं करवाया गया है। यक्ष प्रश्न यहां पर सामने है कि जब चौथे स्तंभ से जुड़े हुए व्यक्ति के साथ ही सिस्टम का खेल इतना लंबा चल सकता है तो अंतिम छोर पर बैठे हुए एक आम आदमी की यह सिस्टम कितनी सुनवाई करता होगा ?

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