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Jhunjhunu update : झुंझुनूं में SBI जनरल इंश्योरेंस को उपभोक्ता आयोग की फटकार

Consumer commission hearing against SBI General Insurance in Jhunjhunu

झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम का भुगतान नहीं करने के मामले में SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है।

आयोग ने कहा कि बीमा कंपनियों का दायित्व है कि वे उपभोक्ताओं को पॉलिसी की शर्तें सरल, स्पष्ट और पारदर्शी भाषा में उपलब्ध करवाएं, ताकि उपभोक्ता अपने अधिकारों और दायित्वों को ठीक से समझ सके।

यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील एवं सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी की पीठ ने सुनाया।

झुंझुनूं निवासी ने लगाया था क्लेम नहीं देने का आरोप

परिवादी प्रदीप कुमार निवासी ग्राम पीपली, तहसील सूरजगढ़ ने आयोग में प्रस्तुत परिवाद में बताया कि उसका बैंक खाता एसबीआई लुहारु शाखा में था।

बैंक के माध्यम से उसने SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी की समूह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। यह पॉलिसी 10 दिसंबर 2016 से 9 दिसंबर 2017 तक प्रभावी थी, जिसके लिए 3600 रुपये प्रीमियम जमा कराया गया था।

हार्ट ऑपरेशन में खर्च हुए लगभग 4 लाख रुपये

परिवादी ने बताया कि जुलाई 2017 में हृदय रोग के चलते उसे जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

उपचार के दौरान ऑपरेशन और वाल्व प्रत्यारोपण सहित करीब 3 लाख 94 हजार 194 रुपये खर्च हुए। उपचार के बाद बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया गया और मांगे गए दस्तावेज भी जमा करवाए गए।

इसके बावजूद कंपनी ने क्लेम का भुगतान नहीं किया।

बीमा कंपनी ने उठाई तकनीकी आपत्तियां

बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, इसलिए क्लेम को “नो क्लेम” कर दिया गया।

साथ ही कंपनी ने क्षेत्राधिकार और आवश्यक पक्षकार नहीं बनाए जाने जैसी तकनीकी आपत्तियां भी आयोग के सामने रखीं।

आयोग ने कहा- झुंझुनूं आयोग को है पूरा अधिकार

आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत झुंझुनूं आयोग को मामले की सुनवाई का पूरा अधिकार प्राप्त है।

आयोग ने कहा कि परिवादी झुंझुनूं जिले का निवासी है और बीमा पॉलिसी में भी उसका पता झुंझुनूं का अंकित है। ऐसे में उपभोक्ता अपने निवास क्षेत्र के आयोग में परिवाद प्रस्तुत कर सकता है।

आयोग ने माना- कंपनी ने बरती सेवा में कमी

आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध अस्पताल के बिल, रसीदें और उपचार संबंधी दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि बीमा कंपनी उपभोक्ता का दावा खारिज करने के लिए कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी।

आयोग ने यह भी कहा कि कंपनी लंबे समय तक एक जैसी आपत्तियां दोहराकर मामले को उलझाती रही, जो न्याय प्रक्रिया की भावना के विपरीत है।

ब्याज सहित भुगतान और मुआवजे के आदेश

आयोग ने SBI लुहारु शाखा और SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से आदेश दिया कि वे परिवादी को उपचार पर खर्च हुई 3 लाख 94 हजार 194 रुपये की राशि अदा करें।

यह राशि 20 फरवरी 2018 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 45 हजार रुपये तथा परिवाद व्यय के रूप में 5 हजार 500 रुपये देने के आदेश भी दिए हैं।

एडवोकेट राजेंद्र सिंह बुडानिया ने की पैरवी

परिवादी की ओर से मामले में पैरवी एडवोकेट राजेंद्र सिंह बुडानिया द्वारा की गई।

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