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Video News: झुंझुनू: सम्मान लौटाकर वीरांगना ने मांगी इच्छा मृत्यु,सैनिको और शहीदों के जिले से यह कैसी तस्वीर ?

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झुंझुनूं, “जब प्रशासन ही नहीं सुन रहा, तो इस इज्जत का क्या करूं?”
ये शब्द हैं शहीद वीरांगना ओम कंवर के, जिन्होंने मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में राज्यस्तरीय सम्मान स्वरूप मिला मोमेंटो लौटा दिया और इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगते हुए ज्ञापन सौंपा।

खेत विवाद में न्याय नहीं मिलने का आरोप

ओम कंवर का कहना है कि वे लंबे समय से अपने खेत और घर को लेकर लगातार प्रताड़ना झेल रही हैं। 19 जुलाई को चार लोगों ने उनके खेत में जबरन घुसकर कब्जा करने की कोशिश की और उनके साथ बदसलूकी व धक्का-मुक्की की।

उन्होंने बताया कि इस घटना की FIR बगड़ थाने में दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस ने यह कहकर टाल दिया कि “ना तो खून निकला, ना कोई गवाह है।”

अकेली महिला, उल्टा फंसाया गया केस में

वीरांगना का कहना था कि “मैं अकेली हूं, ये लोग संगठित होकर मुझे डराते हैं, धमकाते हैं, और कोई मेरी सुनवाई को तैयार नहीं है। उल्टा उनके जेठ के बेटे को फंसाने के लिए फर्जी छेड़छाड़ के केस दर्ज करवाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 164 में बयान भी जबरन दर्ज करवाए जा रहे हैं।

कोर्ट का स्टे, फिर भी निर्माण जारी

विवादित भूमि पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद मकान निर्माण का कार्य चल रहा है। खिड़की-दरवाजे लग रहे हैं, और फसल बोने तक नहीं दी जा रही। धमकी दी जा रही है कि अब जमीन हमारे नाम कर दो नहीं तो ऐसे ही मारेंगे और परेशान करेंगे।

बेटे से मिलने और स्कूल का नाम हटाने की मांग

ओम कंवर ने जिला कलेक्टर से अपने बेटे नरपत सिंह से मिलने की अनुमति मांगी है, जो भारतीय सेना में गुलमर्ग में तैनात है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गांव के जिस स्कूल का नाम उनके शहीद पति सुरेन्द्र सिंह के नाम पर है, उसे अब हटा दिया जाए। क्योकि जब मेरी सुनवाई ही नहीं हो रही तो ऐसे सम्मान का मै क्या करुँगी।

आत्मदाह की चेतावनी, प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

अगर सात दिनों में मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं अपने खेत में आत्मदाह करूंगी, और जिम्मेदार जिला प्रशासन होगा। मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरा अंतिम संस्कार मेरे खेत में किया जाए।

सम्मान लौटाकर पूछी तल्ख बात

ज्ञापन में ओम कंवर ने लिखा
“8 महीने से चक्कर काट रही हूं। अब बताइए, इस इज्जत का क्या करूं, जब मेरी कोई सुनवाई ही नहीं?” शेखावाटी लाइव ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू



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