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8 वर्ष पूरे, 9वें साल में प्रवेश : क्या खोया, क्या पाया : Shekhawati Live

Shekhawati Live completes 8 years of digital journalism

हमारी पूंजी : जुनून, जिद और जनहित का संकल्प।

आज का दिन हमारे लिए सिर्फ एक तिथि नहीं, एक तपस्या का पड़ाव है। इसी दिन आठ वर्ष पूर्व शेखावाटी लाइव की शुरुआत हुई थी। स्थानीय खबरों को निष्पक्ष और निर्भीक स्वर देने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह छोटा-सा डिजिटल प्रयास आज अपने आठ वर्ष पूरे कर नवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में आत्ममूल्यांकन तो बनता ही है—इन वर्षों में हमने क्या खोया, क्या पाया?

एक विचार, जो उस समय “हास्य” बना

जब डिजिटल मीडिया पर पूर्णकालिक निर्भर रहकर पत्रकारिता करने का बीड़ा उठाया गया, तब यह निर्णय बहुतों को अव्यावहारिक और हास्यास्पद लगा। उस दौर में न तो डिजिटल पत्रकारिता को आज जैसा सम्मान प्राप्त था और न ही इस क्षेत्र में संभावनाओं को लेकर व्यापक विश्वास था।

लेकिन एक व्यक्ति की जिद, जुनून और विश्वास ने इस विचार को जमीन दी। नीरज सैनी, संस्थापक एवं समूह संपादक, ने इसे केवल एक मंच नहीं बल्कि मिशन के रूप में देखा। संसाधनों की कमी थी, आर्थिक मजबूती नहीं थी, पर संकल्प अडिग था।

संघर्षों का “अग्निपथ”

यह सफर किसी साधारण पथ पर नहीं, बल्कि अग्निपथ पर चला।

  • सीमित संसाधन
  • तकनीकी चुनौतियां
  • सामाजिक और प्रशासनिक दबाव
  • प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष धमकियां
  • मानसिक प्रताड़ना

इन सबके बावजूद कदम न रुके, न झुके, न थके।

इस यात्रा में कई लोग साथ आए, कुछ बीच राह में हाथ छोड़कर चले भी गएपर जो जले, वही तपे, और जो तपे वही कुंदन बने। आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है कि यह केवल पत्रकारिता नहीं, एक तपस्या थी।

स्थानीय से राष्ट्रीय पहचान तक

शेखावाटी की स्थानीय खबरों के लिए शुरू हुआ यह मंच आज उत्तर भारत तक अपनी पहुंच बना चुका है। जिन मुद्दों को सबसे पहले इस मंच ने उठाया, वे आगे चलकर राष्ट्रीय मीडिया में भी गूंजे।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थापित होने के बाद 2021 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा लागू एथिक्स कोड के तहत पंजीकृत होकर हमने जिम्मेदार डिजिटल मीडिया के रूप में अपनी भूमिका निभाई।

सिर्फ डिजिटल तक सीमित न रहकर हमने प्रिंट मीडिया में भी कदम रखा और शेखावाटी दर्पण समाचार पत्र की शुरुआत की, जो सफलतापूर्वक अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इसके साथ Shekhawati Darpan (shekhawatidarpan.com) भी उच्च गुणवत्ता का कंटेंट पाठकों तक पहुंचा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

संघर्षों के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब मिली जब Google ने वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता को प्रोत्साहित करते हुए JRF के लिए 2000 चयनित लोगों में हमें स्थान दिया। भारत से चुने गए सीमित पत्रकारों में शामिल होना न केवल व्यक्तिगत बल्कि पूरे शेखावाटी क्षेत्र के लिए गौरव का विषय रहा।

क्या खोया?

  • आर्थिक समृद्धि के अनेक अवसर
  • त्वरित लाभ देने वाले विज्ञापन
  • सत्ता और प्रभावशाली वर्गों की कृपा

हमने ऐसे किसी भी विज्ञापन या समझौते को स्वीकार नहीं किया जो हमारे मूल्यों के विपरीत हो। आर्थिक रूप से भले ही हम अत्यधिक संपन्न न हुए हों, पर आत्मसम्मान और विश्वसनीयता का खजाना अवश्य अर्जित किया।

क्या पाया?

  • जनता का विश्वास
  • निर्भीक पत्रकारिता की पहचान
  • अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की आवाज बनने का संतोष
  • पेशेवर और प्रतिबद्ध टीम

आज शेखावाटी लाइव का प्रतीक एक ऐसी पहचान बन चुका है जिसे न प्रलोभन डिगा सकता है, न भय झुका सकता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में हमने संविधान की मर्यादाओं में रहकर जनसरोकार को केंद्र में रखा। यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

हमारा दृष्टिकोण: मिशन, न कि व्यवसाय

इस क्षेत्र में कई संस्थान आर्थिक रूप से हमसे अधिक सुदृढ़ हो चुके हैं। यह स्वीकार करने में हमें संकोच नहीं। क्योंकि हमारा उद्देश्य केवल आय अर्जित करना नहीं था।

हमारी पूंजी रही—जुनून, जिद और जनहित का संकल्प।

हमने उस व्यक्ति की आवाज को सशक्त किया जो व्यवस्था के अंतिम पायदान पर खड़ा है। हमने खबरों को सनसनी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें समाज के हित में जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया।


नवें वर्ष की दहलीज पर: आगे की दिशा

नवें वर्ष में प्रवेश करते हुए हमारा संकल्प और मजबूत है—

  • डिजिटल पत्रकारिता में तकनीकी नवाचार
  • खोजी रिपोर्टिंग को और धार
  • युवाओं को प्रशिक्षित कर नई पत्रकार पीढ़ी तैयार करना
  • तथ्यपरक और समाधानपरक पत्रकारिता को बढ़ावा देना
  • ग्रामीण और अंचल की खबरों को राष्ट्रीय विमर्श तक पहुंचाना

अंत में…

आठ वर्षों की यह यात्रा संघर्ष, समर्पण और विश्वास की कहानी है।
हम आर्थिक रूप से चाहे कितने भी सीमित क्यों न हों, पर नैतिक रूप से समृद्ध हैं।

आज जब आत्मा से प्रश्न करते हैं—क्या हमने चौथे स्तंभ की भूमिका निभाई?
तो उत्तर आता है—हाँ, ईमानदारी से, निर्भीकता से, निरंतरता से।

नवें वर्ष में प्रवेश के साथ हम पुनः वही संकल्प दोहराते हैं—
न रुकेंगे, न झुकेंगे, न थकेंगे।
जनता की आवाज बने रहेंगे।

यही हमारी उपलब्धि है, यही हमारी असली पूंजी।