Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / शेखावाटी में हरित क्रांति के प्रतीक बन गए हैं खेतड़ी के गोपाल कृष्ण शर्मा

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शेखावाटी में हरित क्रांति के प्रतीक बन गए हैं खेतड़ी के गोपाल कृष्ण शर्मा

चार बार हो चुके हैं सम्मानित

खेतड़ी [हर्ष स्वामी ] क्षेत्र को हरा-भरा रखना तथा वृक्षों को बचाना यह जिम्मेवारी आमतौर पर वन विभाग की होती है लेकिन खेतड़ी के लाल गोपाल कृष्ण शर्मा ने हरित क्रांति की परिभाषा ही बदल कर रख गई है अपना आधे से ज्यादा जीवन उन्होंने बड़ और पीपल की छोटी-छोटी पौध बनाने में गुजार दिया है। पिछले 44 वर्षों से लगातार गोपाल कृष्ण शर्मा पेड़ों के नीचे से पक्षियों की बीठ बीन कर बरगद और पीपल की छोटी-छोटी पौध तैयार करते हैं उसके बाद उनका जब एक पौधे के रूप में विकास हो जाता है तो क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को बुलाकर वह पौधे वितरित करते हैं तथा शपथ भी दिलाते हैं कि उनकी रक्षा करें। शेखावाटी का लाडला क्षेत्र में हरित क्रांति का प्रतीक बन गया है । आज मंगलवार को ऐसा ही एक कार्यक्रम का आयोजन कस्बे के अजीत सिंह पार्क के पास किया गया जिसमें पूर्व विधायक दाताराम गुर्जर ,उपखंड अधिकारी इंद्राज सिंह, तहसीलदार, बंशीधर योगी, विकास अधिकारी श्रीमती शशिबाला ,एलआईसी विकास अधिकारी सीताराम जाट, वन विभाग रेंजर विजय फगेङीया ,पालिका अध्यक्ष उमराव सिंह, नगर पालिका ईओ उदय सिंह, डॉ एस पी यादव ,सुरेश पांडे ,प्रिंसिपल संतोष सैनी, मोहित सक्सेना ,महिपाल सिंह सहित दर्जनों अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को बड़ और पीपल के पौधे वितरित किए गए।

-गोपाल कृष्ण शर्मा बच्चों की तरह पालते हैं पौधों को
जिस प्रकार माता पिता एक छोटे बच्चों का पालन पोषण करते हैं उसी प्रकार गोपाल कृष्ण शर्मा और उनका पूरा परिवार छोटे-छोटे बरगद और पीपल के पौधों का लालन पालन करते हैं दिन में तीन बार पानी देना, खाद देना ,तेज धूप से बचाना आदि काम करते हैं पूरे परिवार का आधे से ज्यादा समय इसी काम में लग जाता है हर वर्ष की भांति इस बार 345 पौधे उन्होंने तैयार किए हैं उनके द्वारा वितरित किए गए पौधे श्मशान भूमि ,अजीत अस्पताल ,उपखंड कार्यालय ,बुहाना तहसील के मांजरी आश्रम ,सीहोङ, बीकानेर के नोखा, सीकर ,चूरू जिले में लहलहा रहे हैं।

-पर्यावरण प्रेमी के रूप में चार बार हो चुके हैं सम्मानित
गोपाल कृष्ण शर्मा को लगभग 44 वर्ष हो गए जब से उन्होंने होश संभाला है तब से वह बरगद और पीपल के पौधे को तैयार करने में अपना पूरा समय लगाते हैं उनकी इस मेहनत और लगन के कारण एक बार जिला स्तर पर दो बार वन विभाग द्वारा तथा एक बार उपखंड स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं।

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