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सेना से रिटायरमेंट के बाद सूबेदार रण सिंह चौधरी बने भूतपूर्व सैनिको व उनके परिवारों के मददगार

भूतपूर्व सैनिक के परिवार को उनका हक दिलाकर करते हैं मदद

उदयपुरवाटी, [कैलाश बबेरवाल] बाघोली सेना में रहकर देश सेवा करने के बाद जहा ज्यादातर सैनिक रिटायरमेंट के बाद अपना शेष जीवन परिवार के साथ बिताते हैं लेकिन झुंझुनू जिले की ढाणी में जन्मे सूबेदार रणसिंह चौधरी ऐसे भी जो 2010 में सेनानिवृत्ति के बाद भी अपना जीवन भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों की सेवा में लगा दिया व पिछले 10 सालों से भूतपूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों की समस्याओं का निराकरण कर रहे है। रिटायर्ड सूबेदार चौधरी ने अपने गाँव ढाणियों में भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन, वेतन संबंधित त्रुटियों को दूर करने का काम व वर्षो से रुका हुआ व कम मिल रहे वेतन, बोनस आदि दिलाते है, जब सेना में भर्ती हुए तो सिपाही थे लेकिन उन्हें लिपिक के रूप में कार्य करने का मौका मिला जिससे कि पत्राचार तकनीक आफिस कार्य का उन्हें काफी अनुभव हुआ और रिटायरमेंट के बाद इस अनुभव को उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों, उनकी विधवाओं, वीरांगना व बच्चों को लाभ दिलवाने में इस्तेमाल किया। सूबेदार रण सिंह चौधरी सन 1982 में सेना में भर्ती हुए थे और 28 वर्ष देश सेवा के बाद 2010 सेवानिवृत्त हो गए थे आज सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते है और तो और लोग अपनी पेंशन संबंधी खामियां दूर करने के लिए उन्हें राजस्थान ही नही बल्कि अन्य राज्यो जैसे उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेह आदि से भी भूतपूर्व सैनिक व उनके आश्रित सम्पर्क करते है, आम तोर पर पूर्ण ज्ञान नही होने के कारण कई सैनिको को उनकी पूर्ण पेंशन व वेतन संबंधी खामियों के संबंध में कई बार ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते है कई बार फिर भी उन्हें लाभ नही मिल पाता है इन्ही समस्याओं को देखते है सूबेदार रणसिंह चौधरी ने ठाना की भूतपूर्व सैनिकों की समस्या उनकी समस्या है, सूबेदार चौधरी का मानना है कि जो सैनिक देश के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा देता है, उन्हें अपनी पेंशन व वेतन के लिए कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते है इससे बड़ा दुर्भाग्य देश के लिए क्या होगा। जब भी उनके पास किसी भूतपूर्व सैनिक या उनके आश्रितों की शिकायत आती है तो उन्हें व केवल आश्वास ही नही बल्कि पूरा विश्वास दिलाते है कि उनकी परेशानी को जल्दी ही विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा, उसके आरटीआई के माध्यम से जानकारी जुटाते है और लग जाते है अपने काम मे।
आपको बता दे कि सूबेदार रणसिंह चौधरी इस काम के लिए कोई पैसा नही लेते है बल्कि, डाक, फ़ोटो कॉपी आदि का खर्चा भी स्वयं ही वहन करते है, कहते है कि अगर मेरे कारण किसी सैनिक के या उनके आश्रितों के चेहरे पर मुस्कान और खुशि मिलती है तो इससे बड़ी मेरे लिए कोई कमाई नही है, रक्षा मंत्रायल मुझे समय पर पेंशन दे रहा है यह मेरे लिए पर्याप्त है, सूबेदार रणसिंह चौधरी जी के इस निस्वार्थ कार्य को देखते हुए कई भूतपूर्व सैनिक संग़ठन, सैन्य हितों से जुड़ी सामाजिक संस्थाएं आदि ने उन्हें पद का प्रस्ताव दिया किंतु सूबेदार चौधरी का मानना है कि सैनिको के सेवा के लिए मुझे किसी पद की आवश्यकता नही है। मैं सैदव उनके हितों में कार्य करता रहूंगा मेरा जन्म सेवा के लिए हुआ है।

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