Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रुप में मनाया

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राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रुप में मनाया

आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में झुन्झुनूं जिले के सूरजगढ़ शहर में

झुंझुनू, आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में झुन्झुनूं जिले के सूरजगढ़ शहर में विश्व को शांति का संदेश देने वाले शांतिदूत, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रुप में मनाया। प्रयागराज से रेनू मिश्रा दीपशिखा, फरीदाबाद से कमल धमीजा, गोवा से विकास कुमार, राजस्थान से भागमती कांटीवाल व सुनील कुमार कठानिया और भिवाड़ी से राजेंद्र कुमार आदि ने ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रेनू मिश्रा दीपशिखा ने कहा- देश को आजादी मिलते ही जनवरी का महीना जाते-जाते देश को एक बड़ा जख्म दे गया। 30 जनवरी 1948 का दिन कहने को तो साल के बाकी दिनों जैसा ही था, लेकिन शाम होते होते यह इतिहास में सबसे दुखद दिनों में शुमार हो गया। दरअसल 30 जनवरी 1948 की शाम को एक हत्यारे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी। विडम्बना देखिए कि अहिंसा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर अंग्रेजों को देश से बाहर का रास्ता दिखाने वाले महात्मा गांधी खुद हिंसा का शिकार हो गये। महात्मा गांधी भारतीय इतिहास के एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने देशहित के लिए अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। वह आजादी के आंदोलन के एक ऐसे नेता थे जिन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अंग्रेजी शासकों के नाक में दम कर दिया था। उनकी सत्य और अहिंसा की विचारधारा से मार्टिन लूथर किंग और नेलसन मंडेला भी काफी प्रभावित थे। महात्मा गांधी ने अफ्रीका में भी लगातार 21 वर्षों तक अन्याय और नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष किया, जो अंग्रेजों को अफ्रीका में ही नहीं बल्कि भारत में भी महंगा पड़ा। हसनपुर अमरोहा के एडवोकेट मुजाहिद चौधरी ने कहा- महात्मा गांधी ने अपने असाधारण कार्यों एवं अहिंसावादी विचारों से पूरे विश्व की सोच बदल दी। आजादी एवं शांति की स्थापना ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य था। महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने बापू के बारे में लिखा है कि महात्मा गाँधी की उपलब्धियाँ राजनीतिक इतिहास में अद्भुत हैं। उन्होंने देश को दासता से मुक्त कराने के लिये संघर्ष का ऐसा मार्ग चुना जो मानवीय और अनोखा है। यह एक ऐसा मार्ग है जो पूरी दुनिया के सभ्य समाज को मानवता के बारे में सोचने को मजबूर करता है। उन्होंने लिखा कि हमें इस बात पर प्रसन्न होना चाहिये कि तकदीर ने हमें अपने समय में एक ऐसा व्यक्ति तोहफे में दिया जो आने वाली पीढ़ियों के लिये पथ प्रदर्शक बनेगा। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने कहा-“एक शांतिपूर्ण और टिकाऊ विश्व के लिए महात्मा गाँधी का चिरमय व पथप्रदर्शक संदेश आज भी प्रकाशमान है। उनका जीवन अहिंसक और सामाजिक सौहार्द्र के समय में नैतिक साहस की प्रेरणा देता है और हमें याद दिलाता है कि प्रभावशाली लोगों की गतिविधियाँ और आंदोलन किस तरह सामाजिक बदलावों के लिए प्रेरणास्रोत हो सकते हैं।” महात्मा गांधी आत्मनिर्भरता के सिद्धांत के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने हमेश “स्वदेशी” के बारे में बात की। वे आत्मनिर्भर और समरसतापूर्ण “आदर्श गांवों” के निर्माण की इच्छा रखते थे। वे विश्वास करते थे कि भारत की आत्मा गांवों में निवास करती है। उनके लिए, खादी सिर्फ एक राजनीतिक प्रतीक या राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक नहीं था बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का भी एक साधन भी था।महात्मा गांधी दुनिया के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक है, केवल उनकी क्रांति रक्तहीन और शांतिपूर्ण थी। महात्मा गांधी की हत्या एक विचारधारा ने षड्यंत्र के तहत की थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने वालों में शिक्षाविद राजेंद्र सौंकरिया, संतोष कुमावत, रामेश्वरलाल लोवाड़िया, धर्मपाल गांधी, शिवराज, अभिषेक, दिनेश कुमार, पिंकी नारनोलिया, सुनील गांधी, अमित कुमार, अंजू गांधी, माहिर आदि अन्य लोग शामिल रहे।

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