Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / तीज माता की शाही सवारी निकलेगी 19 अगस्त को

,

तीज माता की शाही सवारी निकलेगी 19 अगस्त को

झुंझुनू, हर साल सावन मास की हरियाली तीज को निकलने वाली श्री गोपाल गौशाला की और से तीज माता की शाही सवारी 19 अगस्त को निकाली जावेगी। जानकारी देते हुए श्री गोपाल गौशाला अध्यक्ष प्रमोद खण्डेलिया एवं मंत्री नेमी अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम के संयोजक नारायण प्रसाद जालान के संयोजकत्व में श्री गोपाल गौशाला प्रांगण से तीज माता की शाही सवारी अपरान्ह 3.30 बजे गाजे बाजे के साथ रवाना होकर झुंझुनू एकेडमी, लावरेश्वर मंदिर, राणी सती रोड चुणा का चौक होकर छावणी बाजार आयेगी जहां श्री गल्ला व्यापार संघ के आतिथ्य में तीज माता की विधिवत रूप से पूजा अर्चना अतिथियों के द्वारा सम्पन्न होगी। अपराह्न 5:00 बजे पूजा अर्चना के पश्चात शाही सवारी ऊंट, घोड़े, बाजे के साथ छावनी बाजार से जोशियां का गट्टा, कपड़ा बाजार होते हुए समस्त तालाब पहुंचेगी जहां पूजा अर्चना के पश्चात वापसी में ढंडों का दरवाजा, खेतान मोहल्ला होते हुए श्री गोपाल गौशाला झुन्झनू मैं शाही सवारी वापस आयेगी ।

किंदवंती कथा के अनुसार तीज श्रावण शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन मनायी जाती है इस दिन भगवती पार्वती सौ वर्षो की तपस्या साधना के बाद भगवान शिव से मिली थी इस दिन मां पार्वती की पूजा की जाती है। राजस्थान में एक बड़ी ही प्यारी लोक कहावत प्रचलित है। तीज तीवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर…यानी सावनी तीज से आरंभ पर्वों की यह सुमधुर श्रृंखला गणगौर के विसर्जन तक चलने वाली है। सारे बड़े त्योहार तीज के बाद ही आते हैं। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, श्राद्ध-पर्व, नवरात्रि, दशहरा, दीपावली का पांच-दिवसीय महापर्व आदि…तीज माता की भव्य सवारी निकाली जाती है जिसको देखकर मन खुशी से झूम उठता है।

हमारो प्यारो रंगीलो राजस्थान हमेशा से ही तीज-त्योहार, रंग-बिरंगे परिधान, उत्सव और लोकगीत व रीति रिवाजों के लिए प्रसिद्ध है। तीज का पर्व राजस्थान के लिए एक अलग ही उमंग लेकर आता है जब महीनों से तपती हुई मरुभूमि में रिमझिम करता सावन आता है तो निश्चित ही किसी उत्सव से कम नहीं होता। श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन श्रावणी तीज, हरियाली तीज मनाई जाती है… इसे मधुश्रवा तृतीया या छोटी तीज भी कहा जाता है।

तीज के एक दिन पहले (द्वितीया तिथि को) विवाहित स्त्रियों के माता-पिता (पीहर पक्ष) अपनी पुत्रियों के घर (ससुराल) सिंजारा भेजते हैं। जबकि कुछ लोग ससुराल से मायके भेजी बहु को सिंजारा भेजते हैं। विवाहित पुत्रियों के लिए भेजे गए उपहारों को सिंजारा कहते हैं, जो कि उस स्त्री के सुहाग का प्रतीक होता है। इसमें बिंदी, मेहंदी, सिन्दूर, चूड़ी, घेवर, लहरिया की साड़ी, ये सब वस्तुएं सिंजारे के रूप में भेजी जाती हैं। सिंजारे के इन उपहारों को अपने पीहर से लेकर, विवाहिता स्त्री उन सब उपहारों से खुद को सजाती है, मेहंदी लगाती है, तरह-तरह के गहने पहनती हैं, लहरिया साड़ी पहनती है और तीज के पर्व का अपने पति और ससुराल वालों के साथ खूब आनंद मनाती है।

Best JEE Coaching Jhunjhunu City
Ravindra School Jhunjhunu City
Prince School, Islampur