उदयपुरवाटी , कैलाश बबेरवाल झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र की गुढ़ागौड़जी तहसील अंतर्गत गुढ़ा बावनी पंचायत के बाड्या नाला क्षेत्र में सोमवार रात दर्दनाक हादसा हो गया।
करीब रात 10 बजे बिजली के शॉर्ट सर्किट से एक झोपड़ी में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया और परिवार की वर्षों की मेहनत पलभर में राख बन गई।
बेटी की सतर्कता से बची परिवार की जान
जानकारी के अनुसार पीड़ित नरसी सैनी अपनी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के साथ झोपड़ी में रहते हैं।
गर्मी के कारण पूरा परिवार घर के बाहर सो रहा था। इसी दौरान बड़ी बेटी ने झोपड़ी से धुआं और आग की लपटें उठती देखीं और तुरंत शोर मचाकर परिवार को जगाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेज थी कि एक बच्चा उसकी चपेट में आने वाला था, लेकिन नरसी सैनी ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
ग्रामीणों ने बचाई स्थिति, लेकिन सब कुछ हो गया राख
शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पानी तथा मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया।
काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक झोपड़ी में रखा अधिकांश सामान पूरी तरह जल चुका था।
₹2 लाख नकदी और जेवरात जलकर खाक
पीड़ित नरसी सैनी ने बताया कि आग में घर में रखा अनाज, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोने-चांदी के जेवरात और दैनिक उपयोग का पूरा सामान नष्ट हो गया।
सबसे बड़ा नुकसान नकदी का हुआ। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही पांच बकरियां बेचकर मिले ₹1 लाख घर में रखे थे।
इसके अलावा भैंस खरीदने के लिए समूह ऋण से प्राप्त ₹1 लाख भी झोपड़ी में रखे हुए थे, जो आग में जलकर राख हो गए।
मजदूरी कर चलाते हैं परिवार का गुजारा
नरसी सैनी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
आग के बाद परिवार के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। परिवार गहरे सदमे में है और भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहा है।
प्रशासन की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों में नाराजगी
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी या पटवारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में रोष है।
मुआवजे और राहत की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल राहत प्रदान की जाए।
साथ ही रहने के लिए अस्थायी आवास, खाद्य सामग्री और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर परिवार को पुनर्वास दिया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब परिवार की वर्षों की जमा-पूंजी एक ही रात में खत्म हो गई है, इसलिए प्रशासन को मानवीय आधार पर तत्काल मदद करनी चाहिए।





