उदयपुरवाटी (कैलाश बबेरवाल झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी कस्बे के वार्ड नंबर 15 निवासी उत्कर्ष मित्तल ने अपनी मेहनत से इतिहास रच दिया है।
जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की है।
पहले ही प्रयास में बड़ी सफलता
एक छोटे से कमरे से निकलकर उत्कर्ष ने यह साबित कर दिया कि हौसले बड़े हों तो सीमाएं मायने नहीं रखतीं।
उन्होंने पहले ही प्रयास में टॉप-10 में जगह बनाकर पूरे शेखावाटी का नाम रोशन किया है।
तकनीक बनी सफलता की ताकत
उत्कर्ष ने अपनी पढ़ाई के लिए स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर, ऑडियो नोट्स और ब्रेल लिपि का सहारा लिया।
दिन-रात मेहनत कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
“सफलता दृष्टि से नहीं, दृष्टिकोण से मिलती है,” – उनके चाचा लेखाधिकारी नवीन शर्मा
परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
उत्कर्ष अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं।
उन्होंने कहा कि दादा-दादी, माता-पिता और भाई ने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे देख नहीं सकते।
“मैंने अपने परिवार की आंखों से दुनिया देखी और आज उनका विश्वास मुझे यहां तक लाया,” – उत्कर्ष मित्तल
अब SDM बनने का लक्ष्य
RAS में चयन को उत्कर्ष अपनी मंजिल नहीं, बल्कि एक पड़ाव मानते हैं।
उनका अगला लक्ष्य एसडीएम बनकर प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करना है।
समाज में खुशी की लहर
उत्कर्ष की सफलता की खबर मिलते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया।
सैकड़ों लोगों ने उन्हें साफा और पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया।
युवाओं के लिए बनी मिसाल
उत्कर्ष की यह उपलब्धि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी कठिनाइयों से घबराकर अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।
उन्होंने साबित कर दिया कि सच्ची सफलता मेहनत और हौसले से मिलती है, ना कि परिस्थितियों से।



