बगड़ (झुंझुनूं)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ज्योति विद्यापीठ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बगड़ मे प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्काउट-गाइड सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर सभी ने धरती को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्थानीय संघ झुंझुनूं के प्रभारी सहायक कमिश्नर एवं विद्यालय प्रबंधक चिरंजी लाल सैनी रहे।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पेड़-पौधे पृथ्वी का अमूल्य धन हैं और इनके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है।
“पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि हमारी दैनिक जिम्मेदारी है।” चिरंजी लाल सैनी
उन्होंने विद्यार्थियों को कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करते हुए उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने की शपथ भी दिलाई।
विद्यालय परिसर में हुआ पौधारोपण
स्काउट मास्टर बंशी लाल के नेतृत्व में विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया।
विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर हरित वातावरण बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी दिए गए।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास
विद्यालय के समन्वयक बद्री विशाल जांगिड़ ने कहा कि प्रकृति की रक्षा के बिना मानव जीवन अधूरा है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय परिवार समय-समय पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित हो सके।
शिक्षकों और विद्यार्थियों का रहा विशेष योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में कुसुमलता, सरोज भास्कर, पार्वती टेलर, सनी सैनी, प्रमोद कुमार कुमावत, नरेश कुमार शर्मा, जयप्रकाश सैनी, योगेश कुमार, हेमलता, वीरेंद्र सिंह शेखावत, सुशील कुमार, विनोद कुमार, प्रवीण कुमार, बृजलाल सहित कब-बुलबुल दल, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा।
अधिक से अधिक वृक्षारोपण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।





