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कुदन के भिकनवासी गांव में चिकित्सा एवं पशु पालन विभाग टीम ने किये स्क्रब टायफस की रोकथाम के उपाय

निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर से सूचित जिले के कुदन के भीकनवासी ग्राम स्क्रब टायफस पॉजिटीव केस सुनिता उम्र 20 वर्ष की सूचना कल प्राप्त हुई जिस पर तुरन्त कार्यवाही करते हुए सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी ने रेपिड रेसपोंस टीम को तुरन्त मौके पर जाने के निर्देश दिये एवं पशुपालन विभाग को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए सुचित किया गया। इस पर बीआरटी टीम के डॉ. परमाननद अटल, बीसीएमओ एवं पशुपालन विभाग के डॉ. अंजन बल ने वहां पहुंच कर रोगथाम उपचार एवं सर्वे कार्य किया । डॉ0 अजय चौधरी ने बताया कि रोगी को 2 जून को एसएमएस में जयपुर में भर्ती करवाया गया था एवं 4 जून को  रोगी की जांच पॉजिटीव पाई गई। उसी दिन रोगी को ही स्वस्थ होने पर डिसचार्ज कर दिया गया। वर्तमान में रोगी स्वस्थ है। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सी.पी. ओला ने बताया की 5 जून केा पॉजिटीव केस के संबंधित क्षेत्र में 42 घरों का सर्वे किया गया, पॉजिटीव केस के 4 सम्पर्कियों को डोक्सीसाइक्लीन दवा दी गई, 89 कमरों में पायथ्रिम स्पे्र किया गया, 13 बल्ड स्लाईड ली गई, 1 ब्लड सैम्पल लिया गया, 4 जगह एमएलओ डाला गया, 23 जगह टेमीफोस डाला गया एवं 3 टंकियो का क्लोरिनेशन किया गया। डॉ. अंजन बल, पशु चिकित्सा अधिकारी के नेतृव में संबंधित क्षेत्र में 42 घरों में पशुओ एवं पशु बाडो में 1 प्रतिशत सायपरमेथ्रिन का स्पे्र किया गया। इस दौरान आस-पास क्षेत्र की कंटीली झाड़ियों को साफ करवाया गया और आईईसी सामग्री का वितरण किया गया। सीएमएचओ ने बताया कि जिले के सभी संस्थानों पर एजिथ्रेामाईसिन एवं डोक्सीसाइक्लीन डायग्नोस्टीक कीट, कीटनाशक एवं लार्विसाइड पर्याप्त मात्र में उपलब्ध है। साथ ही जिला अस्पताल पर स्क्रब टायफस की एलाईजा जांच सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने जानलेवा बिमारी के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। जिले में अब तक 4 स्क्रबटाईफस केस पॉजिटीव पाये गये है। जिनमें 1 नीमकाथाना, 1 श्रीमाधोपुर, 1 सीकर शहर और हॉल ही में 1 पॉजिटीव केस कुदन में पाया गया है। क्या है स्क्रब टाईफस के लक्षणः- सामान्यतय मांसपेशियों में दर्द बुखार के साथ तेज सरदर्द
, त्वचा पर लाल उभरते दाने
, अत्यधिक पसीना आनके के लक्षण पाये जाते है। उन्होंने बताया कि रोग कैसे फैलता है स्क्रब टाईफस – इस रोग का वाहक चिगार माइट्स होती है जो कि जानवरों पर भी पाई जाती है। तथा चुहों के द्वारा प्रसारित होती है। यही बिमारी प्रायः माइट्स की लार्वा अवस्था में काटने पर मनुष्यों में होती है तथा माइट्स की आबादी प्रायः मानसून तथा बसन्त ऋतु में सर्वाधिक होती है। इस दौरान खरपतवार घासकी वृद्धि सर्वाधिक होती है। यह माइट्स घास के मैदान बगीचों
, जंगलों एवं अत्यधिक वनस्पति वाले क्षेत्रों
, झाडियों पानी के स्थलों के पास पाई जाने वाली वनस्पती लकड़ियों पशुओं
, पशुपालकों के बाडों में स्थित दरारों तथा नमी वाले क्षेत्र में पाई जा सकती है। वयस्क माइट्स केवल वनस्पति पदार्थ पर ही पाई जाती है। मनुष्य में स्क्रब टाईफस रोग सवंमित चिगार माइट्स (ओरेन्सिया सुसुगामुसी) के त्वचा पर काटने से होता है।उपचार – उपचार के लिए मरीज को डोक्सीसाइक्लीन दवा दी जाती है और गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को डोक्सीसाइक्लीन के स्थान पर एजिथ्रोमाईसिन दवा दी जाती है।

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