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निपाह वायरस अन्तरिम गाईड लाईन जारी-सतर्कता एवं बचाव ही उपचार

सीएमएचओ डॉ0 अजय चौधरी ने बताया कि निदेशालय से प्राप्त निपाह वायरस अन्तरिम गाईड लाईन के अनुसार सभी खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को गुरूवार  को खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की मिटिंग में निपाह वायरस सर्विलेंश के लिए सर्तक रहने के निर्देश प्रदान किये। डॉ0 चौधरी ने बताया की गाईड लाईन के अनुसार एक्युट एनसिफेलाईटिस कैसेज सर्विलेंश बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस बीमारी के रोगियों को गंभीरता से लेते हुए यह देखना होगा की कहीं असामान्य लक्षण तो नहीं आ रहे। चिकित्सकों को सलाह दी गई है कि किसी रोगी में बुखार के साथ बेहोशी जैसे लक्षण वाले रोगियों को तुरंत अस्पताल में भर्ती हेतु निर्देशित किया गया। ऎसे लक्षण वाले रोगी जो प्रभावी क्षेत्र में 21 दिन तक रहे हो उनको तुरंत जांच एवं एक्युट एनसिफेलाईटिस जांच के पश्चात निपाह वायरस जांच की सलाह दी गई है। वर्तमान में राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान पुणे में जांच की सुविधा उपलब्ध है। डॉ0 चौधरी ने बताया कि जिले के आई.डी.एस.पी. के अन्तर्गत जिला रेपिड रेसपोंस टीम एवं खण्ड रेपिड रेसपोंस टीमों को सर्तक किया गया है। सीएमएचओ डॉ0 अजय चौधरी ने बताया कि केरल में वायरस के प्रकोप की जांच के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित चिकित्सकों का उच्चस्तरीय दल जांच कर रहा है। इस बीच तमिलनाडु में बुखार से पीडितों की निगरानी बढ़ा दी गई है। क्या है निपाह विषाणु -निपाह पशुओं से मुनष्य में फैलता है। इससे पशु और मनुष्य दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते है। इस विषाणु के स्वाभाविक वाहक चमगादड हैं। निपाह वायरस से मुनष्य में कई बिना लक्षण वाले संक्रमण से लेकर एक्यूट रेस्पीरेटरी सिंड्रोम और प्राणघातक इनसेफेलाइटिस तक हो सकता है। कैसे फैलता है वायरस-यह विषाणु संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। क्या है लक्षण अचानक से बुखार आना सिरदर्द, मसल पेन, उल्टी, गर्दन का भारीपन, फोटोफोबिया, कोमा एवं बेहोशी। एनआइवी (निपाह वायरस) से सुअरों और अन्य घरेलू जानवरों में भी बीमारी हो सकती है। टीका नहीं बना- अभी तक  न तो मनुष्य और न ही पशुओं के उपचार के लिए इसका टीका विकसित हुआ है। मनुष्य के मामलों में इसका प्राथमिक उपचार इंटेंसिव सपोर्टिंक केअर (सघन सहायक देखभाल) के जरिए किया जा सकता है। पहली बार कब मिला विषाणु निपाह की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के कामपुंग संंुगई निपाह में बिमारी के फैलने के दौरान हुई थी। उस समय सुअर इसके वाहक थे। सर्वाधिक जौखिम किनको ऎसे लोग जो सुअर पालन से जुडे हो एवं उनके मांस का सेवन करते हो। किसान जो चमगादड़ के सम्पर्क में आते हो । जो चमगादड़ के खाये हुए फल खाते हो। ऎसे व्यक्ति से दूरी बनाये जो निपाह संक्रमित क्षेत्र से आया हो। कैसे बचे-सुअर पालन से जूडे व्यक्तियों से दूरी रखना।हाथों को अच्छी प्रकार से साफ करना।खाये हुये या खराब फल इत्यादि को नहीं खाना। अधपका मांस नहीं खाना। प्रभावित क्षेत्र में यात्रा से बचना। बुखार के साथ बेहोशी जैसे लक्षण होने पर तुरन्त चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

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