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लावारिस बच्ची को बीडीके अस्पताल में भर्ती कराया गया

अस्पताल में पालना ग्रह की स्थापना है – “फैंके नहीं हमें दे”

झुंझुनूं, पीएमओ एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ वीडी बाजिया ने बताया कि राजकीय बीडीके अस्पताल झुंझुनूं में लावारिस नन्ही बच्ची को नवजात शिशु ईकाई में भर्ती कर उपचार आरंभ कर दिया गया है। अस्पताल के सामने स्थित फ्रुट विक्रेता जावेद रियान ने बताया कि वह प्रातःकाल साढ़े सात बजे फ्रुट रेड्डी में सामान लगाने हेतु पहुंचा तो देखा कि रेड्डी पर एक कपड़ा पड़ा है और कपड़े में इधर-उधर हिलने की गतिविधियां हो रहीं हैं। यह देखकर जावेद रियान डर सा गया और उसने अपने साथी आरिफ एवं आदिल को बुलाया। कपड़े को हटाकर देखा तो एक नन्ही बालिका ठंड में सिकुड़ी हुई थी। जावेद ने बच्ची को छूकर देखा तो बच्ची की किलकारी निकल उठी। जावेद भावुक हो गया, आंखों से आंसू आने लगे, जावेद तुरंत बच्ची को लेकर बीडीके अस्पताल की आपातकालीन इकाई की ओर भागा। जहां डॉ रामस्वरूप पायल ने अविलंब बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया तथा पीएमओ एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ वीडी बाजिया एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ जितेंद्र भाम्बू को सुचित किया गया। वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि मिट्टी से सनी हुई बच्ची के शरीर का तापमान अत्यंत कम होने के कारण कोल्ड स्ट्रैस में थी।तथा बच्ची को लंबे समय तक दूध नहीं मिलने से शुगर का लेवल भी काफ़ी कम आ रहा था।सांस लेने पर छाती में गड्ढे पड़ रहे थे नाक फूल रही थी।और बच्ची ग्रंटिंग भी कर रही थी। डॉ जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि बच्ची को मैन्युअल मोड पर रेंडियंट वार्मर को रखकर तापमान को मानक स्तर पर लाया गया है।तथा आवश्यक दवाओं एवं सीपैप मशीन से नवजात शिशु ईकाई में उपचार आरंभ किया गया। डॉ वीडी बाजिया ने बताया कि अस्पताल में पालना ग्रह की स्थापना की हुई है।तथा स्पष्ट शब्दों में अंकित है कि “फैंके नहीं हमें दे” । अतः फैंकने की बजाय अस्पताल में स्थापित पालना ग्रह में छोड़ा जा सकता था।
डॉ भाम्बू ने बताया कि बच्ची के परिक्षण से ज्ञात हुआ कि
-बच्ची लगभग 28-30 सप्ताह की है।
-बच्ची का वजन 1400ग्राम है।
-किसी अस्पताल में प्रसव हुआ प्रतीत हो रहा है।
-प्रसव 12-24 घंटे के अंतराल पूर्व हुआ प्रतीत हो रहा है।
-ऐसी प्रिमेचयोर, जन्म के समय कम वजन एवं सांस में तकलीफ होने वाली बच्ची को नवजात आईसीयू में भर्ती करवाना आवश्यक होता है।
-परंतु भर्ती की बजाय, अस्पताल के बाहर छोड़ना मानवीयता के विपरित प्रतीत होता है। लावारिस बच्चो हेतू बीडीके अस्पताल में पालना ग्रह की स्थापना की हुई।

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