मुंबई (अनिल बेदाग) गुजरात के टेबल टेनिस खिलाड़ी, कोच और स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर रमीज़ सुमरा को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ग्लोबल रिकग्निशन अवॉर्ड प्रदान किया गया है।
यह सम्मान उन्हें खेल जगत में दीर्घकालिक योगदान, उत्कृष्ट कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन में सक्रिय भूमिका के लिए दिया गया।
हजारों आवेदनों में चुने गए रमीज़
जानकारी के अनुसार हर वर्ष दुनिया भर से करीब 15 हजार आवेदन प्राप्त होते हैं, जिनमें से केवल 5.8 प्रतिशत प्रतिभागियों को यह सम्मान मिलता है।
ऐसे में रमीज़ सुमरा की यह उपलब्धि बेहद खास मानी जा रही है।
छोटे क्लब से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
रमीज़ सुमरा ने महज 6 वर्ष की उम्र में टेबल टेनिस खेलना शुरू किया था।
सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून और मेहनत के दम पर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई।
वर्ष 2025 में पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर उन्होंने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
खिलाड़ी से सफल कोच बनने तक
रमीज़ सुमरा को गुजरात के जिला कलेक्टर द्वारा स्पेशल अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने वर्ष 2017 में इंटरनेशनल टेबल टेनिस फेडरेशन (ITTF) लेवल-1 कोचिंग सर्टिफिकेशन हासिल किया।
अब तक वे 250 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं और 30 से ज्यादा खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत कोचिंग कर चुके हैं।
खिलाड़ियों को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
रमीज़ द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ियों में उषा राठौड़ और जीत पंड्या जैसे खिलाड़ी शामिल हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
खेल प्रशासन में भी निभाई अहम भूमिका
रमीज़ सुमरा ने खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
वे त्रिनिदाद एंड टोबैगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में टीम मैनेजर रह चुके हैं।
इसके अलावा 2016 एशिया कप में वालंटियर और गोवा वर्ल्ड टेबल टेनिस स्टार कंटेंडर टूर्नामेंट में संचालन पर्यवेक्षक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
प्रेरणादायक है संघर्ष की कहानी
ग्लोबल रिकग्निशन अवॉर्ड्स के प्रवक्ता एलेक्स स्टर्लिंग ने रमीज़ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यात्रा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
रमीज़ सुमरा की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण किसी भी खिलाड़ी को वैश्विक पहचान दिला सकता है।




