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शादी बनी मिसाल: दूल्हे ने दहेज लेने से किया इनकार, एक रुपया व नारियल लेकर लिए 7 फेरे

उदयपुरवाटी, शिक्षा बढ़ने के साथ ही समाज में कई तरह के सुधार देखने को मिल रहे हैं।समाज के लोग विभिन्न आयोजनों में फिजूलखर्ची भी कम कर रहे हैं। शिक्षित लड़के-लड़की दहेज मुक्त शादी को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण नीमकाथाना के उदयपुरवाटी में देखने को मिला। वार्ड 14 निवासी बद्रीप्रसाद सैनी ने अपने बेटे एडवोकेट राधेश्याम सैनी की शादी नवलगढ़ तहसील के गांव झाझड़ निवासी बजरंग लाल सैनी की पुत्री से की है। दूल्हे के भाई मुकेश तंवर ने बताया कि दहेज को नकारते हुए 1 रुपया व नारियल लेकर दहेज मुक्त विवाह करने की मिसाल समाज में कायम की है। वहीं दूल्हे एडवोकेट राधेश्याम सैनी ने बजरंग लाल सैनी की बेटी यशोदा को पत्नी के रूप में अपनाया। दूल्हे राधेश्याम ने बताया कि पिता बद्री प्रसाद ने यशोदा को ही दहेज माना है। साथ ही में मेरे परिवार और समाज को भी दहेज रूपी प्रथा को समाज से बाहर निकालने की अपील की है।

शिक्षित समाज में दहेज प्रथा समाज के विनाश का कारण है

सैनी समाज अध्यक्ष विनय सैनी ने कहा कि दहेज की समस्या तभी खत्म होगी, जब लड़कियों में खुद में साहस पैदा होगा और मंडप में खड़ी होकर दहेज लोभी लोगों के साथ शादी नहीं करने का निर्णय लेंगी। लेकिन अपने समाज में न तो लोग लड़कियों में हिम्मत आने दे रहे हैं और न ही परिवार वालों में यह समझ आ रही है। क्योंकि दहेज एक सामाजिक विकृति है। जिस घर में जन्म लेती हैं उस घर में बेटियां देवी का रूप कही जाती हैं।

समाज के समझदार लोगों ने दहेज प्रथा को गलत बताया है

सैनी समाज युवा मोर्चा अध्यक्ष कुलदीप कटारिया ने कहा कि दहेज प्रथा एक ऐसी कुरती है जिससे न जाने कितनी ही लड़कियां और उनके माता-पिता काफी परेशानियां झेलते हैं, परिवार में लड़की के जन्म होते ही उसके माता-पिता को उसके दहेज की चिंता हो जाती है। एडवोकेट राधेश्याम ने बिना दहेज के शादी में सात फेरे लेकर समाज को एक नया संदेश दिया है।

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